महाराष्ट्र में दही हांडी उत्सव के दौरान हादसे, दो की मौत और 200 से अधिक लोग घायल

मुंबई। देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर साल की तरह इस बार भी आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। मथुरा और वृंदावन की गलियों से लेकर देशभर के मंदिरों में भगवान कृष्ण जन्मोत्सव की झलक दिखाई दी। मध्यरात्रि को आरती और भजन के बीच भक्तों ने भगवान के जन्म का उल्लासपूर्वक स्वागत किया। लेकिन, महाराष्ट्र से आई खबरों ने इस उल्लास के बीच शोक का माहौल पैदा कर दिया। राज्य में जगह-जगह आयोजित दही हांडी कार्यक्रमों के दौरान कई दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए।

मानखुर्द में हादसा, एक युवक की मौत


जानकारी के अनुसार, मुंबई के मानखुर्द इलाके में दही हांडी बांधते समय एक दर्दनाक हादसा हुआ। 34 वर्षीय जगमोहन शिवकिरण चौधरी पिरामिड बनाते समय अपना संतुलन खो बैठे और पहली मंजिल से नीचे गिर पड़े। उन्हें तुरंत शताब्दी गोवंडी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

किशोर की जान भी गई

इसी बीच दूसरी घटना में 14 वर्षीय किशोर, जो एक गोविंदा मंडली का हिस्सा था, दही हांडी फोड़ने के दौरान गंभीर रूप से घायल हुआ और उसकी भी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को शोकाकुल कर दिया।

210 लोग हुए घायल, अस्पतालों में इलाज जारी

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और सरकारी अस्पतालों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार रात तक कुल 210 लोग घायल पाए गए। इनमें से 68 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं जबकि 142 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

—सेंट्रल मुंबई के अस्पतालों में 91 लोग भर्ती हुए, जिनमें से 60 का इलाज जारी है और 31 को डिस्चार्ज किया गया।

—पूर्वी उपनगरों से 45 घायल सामने आए।

—पश्चिमी उपनगरों में 74 लोग घायल हुए।

डॉक्टरों का कहना है कि सभी घायलों को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है और उम्मीद है कि रविवार या सोमवार तक अधिकांश मरीजों को घर भेज दिया जाएगा।

दही हांडी की परंपरा और महत्व

हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर महाराष्ट्र, खासकर मुंबई में दही हांडी का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में गोविंदा मंडलियां मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर लटकी मटकी फोड़ती हैं। यह परंपरा भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। माना जाता है कि नन्हे कन्हैया को माखन चुराना बेहद पसंद था और वे अपनी टोली के साथ मटकी फोड़कर माखन निकालते थे। इसी वजह से उन्हें ‘माखन चोर’ भी कहा जाता है।

यह परंपरा उत्साह, श्रद्धा और साहस का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, इस बार के हादसों ने त्योहार की खुशियों को गहरे दुख में बदल दिया।