ढोंगी बाबा कनेक्शन में घिरीं रूपाली चाकणकर, NCP महिला प्रदेश अध्यक्ष पद पर संकट के आसार

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद तेजी से उभरता नजर आ रहा है, जिसमें स्वयंभू बाबा की गिरफ्तारी के बाद अब रूपाली चाकणकर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि उन्हें एनसीपी (अजित पवार गुट) की महिला प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इससे पहले वह राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। अब पार्टी के भीतर उनके दूसरे महत्वपूर्ण पद को लेकर भी दबाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों का मानना है कि इस पूरे विवाद का असर पार्टी की छवि पर नकारात्मक रूप से पड़ रहा है।

इस मामले ने पार्टी के अंदर हलचल मचा दी है। हाल ही में गिरफ्तार कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात के साथ रूपाली चाकणकर के नाम के जुड़ने से सियासी माहौल गर्म हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर एनसीपी (अजित पवार गुट) के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से विचार-विमर्श किया है। बताया जा रहा है कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल समेत कई बड़े नेताओं ने ‘देवगिरी’ बंगले पर एक अहम बैठक की, जिसमें चाकणकर के भविष्य और पार्टी की साख पर पड़ रहे असर को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि राज्य महिला आयोग के पद से इस्तीफा देने के बाद अब रूपाली चाकणकर को संगठन में भी बड़ी जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है, ताकि आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की नकारात्मक छवि से बचा जा सके।

हालांकि, चाकणकर ने अपने इस्तीफे को “व्यक्तिगत कारणों” और “निष्पक्ष जांच” से जोड़ते हुए पद छोड़ा था, लेकिन पार्टी के अंदर की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उन्हें महिला विंग के प्रमुख पद पर बनाए रखना पार्टी के लिए जोखिम भरा कदम हो सकता है।

विपक्ष लगातार उन पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जिसमें अशोक खरात को कथित संरक्षण देने की बात भी शामिल है। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ नार्को टेस्ट की मांग भी तेज होती जा रही है। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठा सकता है।

कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी की साख और राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ गया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनसीपी (अजित पवार गुट) इस संकट से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।