केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के सरकार बदलने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का फैसला जनता करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है और मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके यह तय करते हैं कि देश में किसकी सरकार बनेगी। अठावले ने उद्धव ठाकरे को आगामी 2029 के चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर वे बदलाव चाहते हैं, तो चुनाव में इसका प्रयास कर सकते हैं, लेकिन सरकार बदलना केवल किसी एक नेता के हाथ में नहीं होता। रामदास अठावले ने अपने बयान में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोग मतदान करते हैं और अपने वोट के जरिए सरकार चुनते हैं। भारत की तुलना बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका से करते हुए उन्होंने कहा कि देश डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान के अनुसार चलता है। उनके मुताबिक, सत्ता परिवर्तन का निर्णय किसी नेता की इच्छा से नहीं, बल्कि जनता के मतों और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए होता है।
उद्धव ठाकरे के बयान पर रामदास अठावले की प्रतिक्रियाशिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के सरकार बदलने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि अगर ठाकरे बदलाव चाहते हैं, तो उनके पास 2029 के आगामी चुनावों में इसे हासिल करने की कोशिश करने का अवसर है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार बदलने का फैसला अकेले उद्धव ठाकरे नहीं कर सकते, क्योंकि लोकतंत्र में अंतिम अधिकार मतदाताओं के पास होता है। अठावले ने कहा, “अगर उद्धव ठाकरे बदलाव चाहते हैं, तो वे 2029 के आगामी चुनावों में इसकी कोशिश कर सकते हैं। यह सिर्फ उनके हाथ में नहीं है बल्कि जनता के हाथ में है। करोड़ों लोग मतदान करते हैं और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके सरकार चुनते हैं। यह बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका नहीं है। हमारा देश डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान के अनुसार चलता है।” उनके इस बयान का मुख्य जोर चुनावी प्रक्रिया और जनता के फैसले पर रहा। अठावले ने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनावों से होकर गुजरता है। सरकार का गठन जनता के मतों और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप होता है। इस तरह उन्होंने उद्धव ठाकरे के बयान के जवाब में लोकतांत्रिक व्यवस्था को सरकार बदलने का आधार बताया।
चुनाव और संविधान के जरिए होता है सत्ता परिवर्तनरामदास अठावले ने अपने वक्तव्य में लोकतंत्र में चुनावों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत में सरकार बदलने का फैसला मतदाता अपने वोट के माध्यम से करते हैं। देश में करोड़ों लोग मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और अपने मताधिकार का उपयोग करके सरकार चुनते हैं। उनके अनुसार, सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया किसी एक राजनीतिक नेता की इच्छा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जनता के सामूहिक फैसले से तय होती है। केंद्रीय मंत्री ने भारत की शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चलता है। उनके बयान के मुताबिक, भारत में राजनीतिक बदलाव के लिए चुनाव ही लोकतांत्रिक माध्यम हैं और सरकार का गठन इसी प्रक्रिया के जरिए होता है। अठावले ने अपने जवाब में बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत की व्यवस्था को इन देशों से अलग बताते हुए कहा कि यहां सरकार का फैसला जनता के वोट और संविधान के अनुसार होता है। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल या नेता सत्ता में बदलाव चाहता है, तो उसे चुनाव के जरिए जनता का समर्थन हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।
कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ पर भी बोले रामदास अठावलेउद्धव ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देने के अलावा केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर भी अपनी बात रखी। इस घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से प्रशासन और पूजा समिति पर सवाल उठाए जाने के मुद्दे पर अठावले ने विपक्ष पर घटनाओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी हादसे को केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के सत्ता में आने से जोड़ना उचित नहीं है। अठावले के मुताबिक, किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करने से पहले उसके वास्तविक कारणों और तथ्यों को समझना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों पर आपत्ति जताई और कहा कि हर घटना को राजनीतिक नजरिए से देखना सही नहीं है। रामदास अठावले ने कहा, “मुझे लगता है कि आजकल विपक्ष हर मुद्दे का राजनीतिकरण कर देता है। जहां तक भगदड़ की बात है, यह आरोप लगाना कि पश्चिम बंगाल में यह घटना इसलिए हुई, क्योंकि हमारी एनडीए सरकार सत्ता में आई है, बिल्कुल भी उचित नहीं है।” इस बयान में अठावले ने कोलकाता की घटना को केंद्र की एनडीए सरकार के सत्ता में आने से जोड़ने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी हादसे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से पहले उसके पीछे की परिस्थितियों और वास्तविक वजहों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
हादसे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी: अठावलेकोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में रामदास अठावले ने कहा कि दुर्घटनाओं को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जोड़ने के बजाय उनके वास्तविक कारणों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी घटना के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से पहले तथ्यों को समझना आवश्यक है। अठावले ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्य में टीसी के नेता इस घटना को लेकर आरोप लगा रहे हैं, वह उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी हादसे होते रहे हैं, लेकिन उस समय इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी जाती थी। केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी का आशय यह था कि किसी दुर्घटना को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाने के बजाय उसकी वजहों और परिस्थितियों की जांच पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोलकाता की भगदड़ को एनडीए सरकार के सत्ता में आने से जोड़ना सही नहीं है।