महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों पुराने रिश्तों की बर्फ पिघलती नजर आ रही है। हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बीच ठाकरे परिवार में सुलह की बयार चल रही है। करीब दो दशक से ठंडे पड़े आपसी संबंधों में अब गर्माहट लौटती दिख रही है। बीते महीने सार्वजनिक मंच पर एक साथ नजर आने के बाद, राज ठाकरे ने एक बार फिर अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मुलाकात की है।
राज ठाकरे अपनी पत्नी शर्मिला ठाकरे के साथ पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं देने मातोश्री पहुंचे। वर्षों बाद इस पारिवारिक मुलाकात में न सिर्फ शुभकामनाएं दी गईं, बल्कि एक गुलाबों का गुलदस्ता भी भेंट किया गया। दोनों भाई गले मिले, मुस्कराए और लगभग 20 मिनट तक आपस में बातचीत की।
मातोश्री में जन्मदिन की रौनकरविवार को शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे का 65वां जन्मदिन मातोश्री में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस मौके पर राज ठाकरे के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के वरिष्ठ नेता नितिन सरदेसाई भी मौजूद रहे। शिवसेना (उद्धव) के वरिष्ठ नेता संजय राउत, अनिल परब और अम्बादास दानवे सहित कई अन्य नेता भी इस अवसर पर मातोश्री पहुंचे।
कभी करीबी रिश्तों में आई दूरी अब सुलझती नजर आ रही है। एक समय था जब राज ठाकरे, बाल ठाकरे और उद्धव के साथ नियमित रूप से दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ मतभेद इतने बढ़े कि राज का मातोश्री आना बंद हो गया था। बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद वर्ष 2012 में राज आखिरी बार मातोश्री गए थे।
अतीत की दरारें भरने की कोशिशराज ठाकरे कुछ वर्षों पूर्व तब भी मातोश्री पहुंचे थे, जब उद्धव ठाकरे अस्पताल में हृदय रोग का इलाज करवा रहे थे। उस दौरान उन्होंने उद्धव को अपनी गाड़ी से मातोश्री छोड़ने का जिम्मा उठाया था। इसके अलावा, जब उनके बेटे अमित ठाकरे की शादी का कार्ड देने की बारी आई, तब भी राज मातोश्री पहुंचे थे।
5 जुलाई की साझा मौजूदगी बनी थी चर्चा का विषय5 जुलाई को दोनों ठाकरे भाई एक मंच पर भी नजर आए थे, जिससे राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा शुरू हुई थी — क्या ये मुलाकातें भविष्य में किसी राजनीतिक समीकरण का संकेत हैं? यह अब एक बड़ा सवाल बन चुका है।
राज ठाकरे का बार-बार मातोश्री आना और उद्धव ठाकरे से मिलना इस बात का संकेत है कि परिवार की पुरानी दीवारें अब दरक रही हैं और एकता की नई इमारत खड़ी होने की संभावनाएं प्रबल होती जा रही हैं।