मुंबई महानगरपालिका को आज नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। देश की सबसे समृद्ध नगर निगम कही जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे मेयर पद के लिए मतदान होगा। इसके तुरंत बाद उपमहापौर का चुनाव भी संपन्न कराया जाएगा। इस बार चुनाव प्रक्रिया औपचारिकता भर मानी जा रही है, क्योंकि किसी अन्य दल ने मेयर पद के लिए प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है।
यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय तक बीएमसी की सत्ता पर काबिज रही शिवसेना (यूबीटी) के प्रभाव को समाप्त करते हुए बीजेपी अब यहां अपना महापौर बनाने जा रही है। खास बात यह है कि पार्टी की ओर से रितु तावडे को उम्मीदवार बनाया गया है, जो आज बीएमसी की पहली महिला बीजेपी मेयर के रूप में इतिहास रचेंगी।
बीएमसी मुख्यालय पर सजा उत्सव का माहौलमेयर चुनाव को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ देखा जा सकता है। बीएमसी मुख्यालय के बाहर बड़े-बड़े भगवा पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें इस दिन को “सुवर्ण अध्याय की शुरुआत” बताया गया है। पार्टी इसे मुंबई की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
निर्विरोध जीत लगभग तयबीजेपी ने मेयर पद के लिए रितु तावडे को मैदान में उतारा है, जबकि डिप्टी मेयर पद के लिए शिवसेना ने संजय घाडी को उम्मीदवार बनाया है। मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए दोनों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। रितु तावडे वार्ड 132 से पार्षद हैं, जबकि संजय घाडी हाल ही में 15 जनवरी को हुए नगर निकाय चुनाव में वार्ड 5 से विजयी हुए थे। सत्तारूढ़ गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण परिणाम को लेकर किसी तरह की अनिश्चितता नहीं है।
शीर्ष नेतृत्व रहेगा मौजूदमेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार बीएमसी मुख्यालय में उपस्थित रहेंगे। सुनेत्रा पवार, जो राज्य की नई और पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं, पहली बार बीएमसी मुख्यालय पहुंचेंगी। इस मौके को राजनीतिक रूप से भी खास महत्व दिया जा रहा है।
बीएमसी में बीजेपी की वापसीरितु तावडे मुंबई की 77वीं मेयर होंगी। वह बीएमसी में इस पद पर आसीन होने वाली बीजेपी की दूसरी प्रतिनिधि होंगी। इससे पहले डॉ. प्रभाकर पई 1982-83 के दौरान मेयर रहे थे। 1997 में अविभाजित शिवसेना ने बीएमसी की सत्ता संभाली थी और करीब 25 वर्षों तक उसका वर्चस्व बना रहा। अब लगभग तीन दशकों बाद बीजेपी दोबारा नगर निगम की कमान संभालने जा रही है, जिसे पार्टी अपनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मान रही है।
चुनावी गणित ने बदला समीकरण227 सदस्यीय बीएमसी में हुए चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 118 पार्षद हैं, जो बहुमत के 114 के आंकड़े से अधिक है। इसी आधार पर मेयर पद पर बीजेपी की दावेदारी मजबूत हुई।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी), जिसने 1997 से लेकर 25 वर्षों तक बीएमसी पर शासन किया, इस बार 65 सीटों पर सिमट गई। उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को 6 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) को 1 सीट मिली। अन्य दलों में कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं, एआईएमआईएम को 8, एनसीपी (अजित पवार गुट) को 3 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें प्राप्त हुईं। नौ वर्षों के अंतराल के बाद हुए इस महत्वपूर्ण चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुए।
मुंबई की राजनीति में यह बदलाव केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि नए नेतृत्व में बीएमसी प्रशासन किस दिशा में आगे बढ़ता है।