महाराष्ट्र की सियासत में मंगलवार (29 जुलाई) को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब पूर्व मंत्री सुरेश अंबादासराव वरपुडकर ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थाम लिया। अपने समर्थकों के साथ बीजेपी में प्रवेश कर उन्होंने आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस को एक बड़ा झटका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से परभणी क्षेत्र में बीजेपी की स्थिति और सशक्त हो सकती है।
पार्टी कार्यालय में हुआ जोरदार स्वागतवरपुडकर के भाजपा में प्रवेश को लेकर पार्टी कार्यालय में एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जहां महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने उनका और उनके समर्थकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर चव्हाण ने कहा कि वरपुडकर ने हमेशा समाजसेवा को प्राथमिकता दी है और भाजपा की नीति तथा नेतृत्व से प्रेरित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया है।
'मजबूत महाराष्ट्र के लिए अहम योगदान' – रवींद्र चव्हाणरवींद्र चव्हाण ने इस मौके पर कहा, वरपुडकर के आने से न सिर्फ पार्टी संगठन को बल मिलेगा, बल्कि महाराष्ट्र को प्रगतिशील दिशा में आगे ले जाने की हमारी सोच को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पार्टी की जनसेवा और विकास की नीति ने उन्हें आकर्षित किया।
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, चव्हाण ने यह भी जोड़ा कि वरपुडकर का राजनीतिक अनुभव पार्टी को परभणी क्षेत्र में एक नई ऊर्जा देगा। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि बीजेपी में आने वाले हर व्यक्ति को सम्मान और जिम्मेदारी मिलती है, जो वरपुडकर और उनके साथियों को भी दी जाएगी।
'विकास की नीति से प्रेरित हूं' – सुरेश वरपुडकरबीजेपी में शामिल होने के बाद सुरेश वरपुडकर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “मैं बीजेपी की नीतियों और विचारधारा से प्रभावित हूं, और समाज के व्यापक हित में इस मंच के जरिए कार्य करना चाहता हूं। सभी कार्यकर्ताओं के सहयोग से मैं पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करूंगा।” इस कार्यक्रम में परभणी की संरक्षक मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डिकर भी उपस्थित रहीं।
आगामी चुनाव से पहले दल-बदल का दौरगौरतलब है कि महाराष्ट्र के कई जिलों में निकट भविष्य में नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में हर राजनीतिक दल अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटा है। नेताओं के पार्टी बदलने और बयानबाज़ी का दौर तेज हो चुका है। सुरेश वरपुडकर का बीजेपी में शामिल होना भी इस रणनीतिक गतिविधियों की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।