बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के शेयरों ने जबरदस्त छलांग लगाई। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली इस कंपनी के शेयरों में 5% की तेज़ी आई और यह 404.05 रुपये के इंट्रा डे हाई तक पहुंच गया। इस तेज़ी का मुख्य कारण एक बड़ा रक्षा सौदा रहा, जिसने कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों का विश्वास बढ़ा दिया।
जर्मन डिफेंस कंपनी राइनमेटल ने दिया ₹600 करोड़ का ऑर्डररिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा क्षेत्र की सहायक कंपनी रिलायंस डिफेंस को एक जर्मन रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी राइनमेटल वेफ म्यूनिशन जीएमबीएच से 600 करोड़ रुपये का निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह सौदा भारत के किसी प्राइवेट रक्षा निर्माता को दिया गया अब तक के सबसे बड़े हाई-टेक गोला-बारूद ऑर्डरों में से एक माना जा रहा है। इस डील की पुष्टि कंपनी ने स्वयं की है और इसे 'मेक इन इंडिया' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन के अंतर्गत भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता के लिए मील का पत्थर बताया गया है।
क्या है इस डील का महत्व और असर?
यह डील रिलायंस डिफेंस और राइनमेटल के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाती है। इससे न केवल भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताएं सशक्त होंगी, बल्कि भारतीय कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा में उतरने का रास्ता भी साफ होगा। रिलायंस डिफेंस इस ऑर्डर की पूर्ति महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में बन रहे आगामी धीरूभाई अंबानी डिफेंस सिटी (DADC) से करने की योजना बना रही है।
धीरूभाई अंबानी डिफेंस सिटी: भारत की रक्षा शक्ति को मिलेगी नई दिशारत्नागिरी में विकसित किया जा रहा DADC परिसर भारत में निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित किया जा रहा सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब होगा। इसमें गोला-बारूद, विस्फोटक, छोटे हथियार, और उनकी निर्माण से जुड़ी तमाम इंटीग्रेटेड सुविधाएं मौजूद रहेंगी। यह परियोजना भारतीय रक्षा उत्पादन को वैश्विक मानकों तक ले जाने की दृष्टि से एक अहम पहल मानी जा रही है।
अनिल अंबानी ने क्या कहा?रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने इस डील को भारत की रक्षा निर्यात क्षमताओं में एक गति देने वाला क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सौदा भारत में अत्याधुनिक तकनीकों को लाएगा और रिलायंस डिफेंस को देश के टॉप 3 रक्षा निर्यातकों में शामिल कर देगा। साथ ही उन्होंने इसे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति करार दिया।
राइनमेटल की प्रतिक्रिया: भारत पर भरोसे की मुहरराइनमेटल के सीईओ आर्मिन पैपरगर ने इस साझेदारी को भारत के साथ अपने दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों की पुष्टि बताया। उनका मानना है कि यह डील भारत के प्राइवेट सेक्टर में मौजूद क्षमताओं पर विश्वास का परिचायक है। राइनमेटल, जिसका मार्केट कैप 80 बिलियन यूरो से अधिक है और जिसने 2024 में 9.8 बिलियन यूरो का रेवेन्यू दर्ज किया, उसे वैश्विक रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में गिना जाता है।
शेयर बाजार में निवेशकों की दीवानी प्रतिक्रियाइस डील की घोषणा के साथ ही बाजार में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयरों की मांग में जबरदस्त उछाल आया। कंपनी का शेयर 5% की ऊपरी सीमा को छू गया और ट्रेडिंग सेशन में अपर सर्किट में बंद हुआ। निवेशकों का मानना है कि यह सौदा न केवल कंपनी की कमाई में नई ऊंचाई लाएगा, बल्कि इसके भविष्य के ग्रोथ पोटेंशियल को भी सुरक्षित करेगा।
रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों का बढ़ता प्रभावभारत सरकार की नीतियों के अनुसार, अब रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस दिशा में रिलायंस डिफेंस जैसे समूहों की भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत न केवल आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की ओर अग्रसर है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाज़ार में भी मजबूत पैर जमाने के लिए तैयार है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम
रिलायंस डिफेंस और राइनमेटल के बीच हुआ ₹600 करोड़ का यह सौदा भारतीय रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका को मजबूती देने वाला है। इससे यह साबित होता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनने की राह पर है। यह डील न केवल रिलायंस के लिए, बल्कि भारत की समग्र सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठा के लिए भी एक बड़ी छलांग मानी जाएगी।