अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवादों के बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार से एक बड़ी खबर सामने आई है। महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दान ने नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और श्रद्धा भाव से खुलकर दान कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान महाकाल मंदिर को 142 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा प्राप्त हुआ है।
खास बात यह है कि बीते वर्ष की तुलना में इस बार दान राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंदिर को पिछले साल के मुकाबले लगभग 27 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा केवल नकद और विभिन्न माध्यमों से प्राप्त दान का है। इसमें श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों का मूल्य शामिल नहीं है, जिसकी कीमत अलग से करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है।
दान पेटियों से ही पहुंचे 78 करोड़ रुपयेमहाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन दान, ऑफलाइन योगदान और गुप्त दान के माध्यम से कुल लगभग 80 करोड़ रुपये अर्पित किए हैं। इनमें से अकेले दान पेटियों से ही करीब 78 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके अलावा पांच करोड़ रुपये से अधिक का दान उन श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया, जिन्होंने मंदिर काउंटर पर राशि जमा कर उसकी विधिवत रसीद प्राप्त की।
वहीं गुप्त दान के रूप में भी मंदिर को साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने मनी ऑर्डर के माध्यम से भी योगदान दिया, जिससे मंदिर को लगभग 1.23 लाख रुपये प्राप्त हुए। नकद दान के अलावा बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य कीमती आभूषण भी मंदिर को अर्पित किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
कड़ी निगरानी में होती है चढ़ावे की पूरी प्रक्रियामहाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भले ही अयोध्या के राम मंदिर की तुलना में कम हो, लेकिन यहां मिलने वाले चढ़ावे की राशि सभी को चौंकाने वाली है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि दान और चढ़ावे की गिनती पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जाती है और इसके लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया के अनुसार चढ़ावे की गिनती से जुड़ी पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे। प्रशासन का यह भी कहना है कि मंदिर की बढ़ती आय के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और विभिन्न विकास कार्यों पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
महाकाल लोक बनने के बाद और बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्थाउज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता अत्यंत विशेष मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। हालांकि महाकाल लोक के निर्माण और विस्तार के बाद यहां आने वाले भक्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
महाकाल लोक ने न केवल उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दी है, बल्कि इससे श्रद्धालुओं की आस्था भी और अधिक मजबूत हुई है। यही कारण है कि दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ दान और चढ़ावे में भी लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। बाबा महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखने वाले भक्त अपनी आस्था प्रकट करने के लिए उदारता से दान कर रहे हैं, जिससे मंदिर की आय नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है।