‘मकान मत गिराओ’... आतंकी कार्रवाई पर महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल

दिल्ली में हुए बम धमाकों से जुड़े आतंकियों और उनके कथित मददगारों पर चल रही सख़्त कार्रवाई को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) अध्यक्ष व जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनके परिवारों को भी निशाना बना रही हैं, जिससे आम लोगों के मन में अनावश्यक भय पैदा हो रहा है।

निर्दोष परिजनों के घर टूटना न्याय के खिलाफ: महबूबा

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि धमाके को अंजाम देने वालों को कानून के तहत कठोरतम सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन उनके घर गिराना या उन परिजनों को हिरासत में लेना, जिनका किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है, पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पुलिस की व्यापक स्तर की छापेमारी और गिरफ्तारियों से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है।

गौरतलब है कि लाल किले के पास हुए विस्फोट में शामिल बताए जा रहे डॉ. उमर नबी के पुलवामा स्थित घर को गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया गया था। इस कार्रवाई ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

‘हम अपराधियों के खिलाफ हैं, लेकिन निरपराधों को क्यों सज़ा?’

महबूबा मुफ्ती ने दोहराया कि उनकी पार्टी आतंकियों के प्रति नरमी की पक्षधर नहीं है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सामूहिक दंड देने की नीति लोकतांत्रिक और मानवाधिकार मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पुलिस जिस तरह ‘संदेह’ के नाम पर कई लोगों को हिरासत में ले रही है, उससे स्थानीय लोग भयभीत हैं और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान को भी याद दिलाया कि “कानून अपना काम करेगा।” मुफ्ती ने कहा कि यदि कानून वास्तव में अपना काम करे, तो कार्रवाई केवल उन्हीं पर होनी चाहिए जो दोषी हैं, न कि उन पर जिनका अपराध से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है।

“आतंकियों के घर गिराना समाधान नहीं”

आतंकवाद से जुड़े आरोपियों के घरों को विस्फोट कर गिराने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए महबूबा ने कहा कि यह तरीका न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि इससे निर्दोष परिवारों पर मानसिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन गैरकानूनी कदम किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकते।

उन्होंने दिल्ली धमाके में संदिग्धों के परिचितों और दोस्तों की ‘अंधाधुंध’ गिरफ्तारी को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाने की मांग की।

उमर अब्दुल्ला ने भी उठाई आवाज़


पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि आतंकी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के घर ढहाने से आतंकवाद समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम केवल लोगों में गुस्सा और नाराजगी पैदा करते हैं, जबकि आतंकवाद के मूल कारणों को समझने और उन्हें खत्म करने की दिशा में कोई काम नहीं होता।

उन्होंने यह भी कहा कि जो निर्दोष हैं, उनके घर गिराना उन्हें मुख्यधारा से दूर धकेल सकता है और यह सुरक्षा रणनीति के लिए दीर्घकालिक रूप से हानिकारक है।