केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राहुल गांधी की बहस की चुनौती का जवाब दिया है। गुरुवार, 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में बीजेपी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के दौरान शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना चाहिए। सरकार SIR पर बहस के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। शाह ने राहुल गांधी पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और चुनावी हार के बाद अराजकता फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र में चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, इसलिए विपक्ष को सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय सदन में अपनी बात रखनी चाहिए।
राहुल गांधी को अमित शाह की चुनौती- पीएम मोदी को लिखें पत्रकरनाल में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को बहस की चुनौती दे रहे हैं। अगर वह सचमुच SIR पर चर्चा चाहते हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखना चाहिए। शाह के मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। गृह मंत्री ने राहुल गांधी से संसद में आमने-सामने चर्चा करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन में मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय हंगामा और बहिष्कार करता है। शाह ने कहा कि संसद में बहस के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं और विपक्ष को अपनी आपत्तियां वहीं रखनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। राहुल गांधी ने 3 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती दी थी। इससे पहले 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की रैली में भी चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग को लेकर सवाल उठाए गए थे।
'SIR नहीं था, तब भी कांग्रेस चुनाव हारी'
अमित शाह ने कांग्रेस की चुनावी हार का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी SIR को हार की वजह बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों का उदाहरण दिया और कहा कि इन चुनावों के दौरान SIR नहीं हुआ था, इसके बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। शाह ने हरियाणा और महाराष्ट्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भी SIR नहीं हुआ था, फिर भी कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकी। गृह मंत्री ने राहुल गांधी के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कथित तौर पर एक करोड़ वोट हटाए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर आपत्ति है तो उसे संसद में तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। शाह ने राहुल गांधी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखने पर सरकार विशेष सत्र बुलाकर इस विषय पर चर्चा कराने के लिए तैयार है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटने का दावारैली में अमित शाह ने कांग्रेस के संगठन और चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी में राहुल गांधी की अलग-अलग भूमिकाओं का जिक्र करते हुए विधायकों की संख्या के आंकड़े पेश किए। शाह ने दावा किया कि वर्ष 2007 में जब राहुल गांधी कांग्रेस के महासचिव बने थे, तब पार्टी के पास करीब 1,200 विधायक थे। उनके उपाध्यक्ष बनने के समय यह संख्या घटकर 900 रह गई। इसके बाद जब वह पार्टी अध्यक्ष बने तो विधायकों की संख्या करीब 700 तक पहुंच गई। गृह मंत्री ने आगे कहा कि वर्ष 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के बाद भी कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर लगभग 600 रह गई। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए और कहा कि उनके पार्टी में आने के बाद से कांग्रेस के विधायक लगातार कम हुए हैं। इसके उलट शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के विधायकों और सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ये आंकड़े शाह ने अपने राजनीतिक भाषण में पेश किए; इन्हें पार्टीवार और अलग-अलग समय के चुनावी परिणामों के आधिकारिक आंकड़ों के रूप में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
कबड्डी का उदाहरण देकर राहुल गांधी पर कसा तंजअमित शाह ने राहुल गांधी पर तंज कसने के लिए अपने स्कूल के दिनों का एक उदाहरण भी सुनाया। उन्होंने कहा कि बचपन में वह कबड्डी खेलते थे और उनकी सातवीं कक्षा की टीम लगातार चैंपियन बनती थी। दूसरी ओर, नौवीं कक्षा की टीम बार-बार हार रही थी। शाह के मुताबिक, लगातार हार से परेशान होकर नौवीं कक्षा के छात्रों ने बैठक की। उन्हें लगा कि उनसे छोटी कक्षा की टीम लगातार जीत रही है, जिससे उनका अहं आहत हो रहा है। इसके बाद उन्होंने रणनीति बनाई कि अगर रेफरी को ही धोखेबाज बता दिया जाए तो अपनी जीत पक्की की जा सकती है। इसी कहानी के जरिए गृह मंत्री ने विपक्ष की ओर से निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए जा रहे आरोपों पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लगता है राहुल गांधी ने भी उन छात्रों की रणनीति सुन ली होगी। शाह ने कहा, 'रेफरी को ही चीटर कह दो, तो हमारी जीत पक्की हो जाएगी।'
संसद में हंगामे और बहिष्कार को लेकर कांग्रेस पर आरोपगृह मंत्री ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही नहीं चलने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने सदन में हंगामा करने और बहिष्कार करने को अपनी राजनीतिक संस्कृति बना लिया है। शाह ने कहा कि लोकतंत्र में संसद चर्चा का सर्वोच्च मंच है। यदि विपक्ष को SIR या चुनावी प्रक्रिया पर कोई सवाल उठाना है तो उसे सदन में बहस करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संसद में चर्चा करने के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करके राजनीतिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। बीजेपी का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान भी विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में चलाया जा रहा है। करनाल में शाह ने इसी अभियान के तहत मार्च का नेतृत्व किया और रैली को संबोधित किया।
SIR को लेकर बीजेपी और विपक्ष में टकराव जारी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, बीजेपी SIR को मतदाता सूची की सफाई और उसमें मौजूद कथित अनियमितताओं को दूर करने की प्रक्रिया बता रही है। करनाल की रैली में अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दी। उन्होंने साफ कहा कि सरकार विशेष सत्र बुलाने को तैयार है, लेकिन चर्चा संसद के भीतर होनी चाहिए।