तिहाड़ जेल में जमीन पर सो रहे CJP के आशुतोष रांका और सौरभ दास, सुरक्षा के लिए 24 घंटे पहरा; ब्लेडबाजी का भी खतरा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरभ दास तिहाड़ जेल में पांच दिन की न्यायिक हिरासत काट रहे हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में उन्हें जेल भेजा गया था। जेल में दोनों को अलग-अलग कोठरियों में रखा गया है। उन्हें आम विचाराधीन कैदियों की तरह जमीन पर सोना पड़ रहा है और ओढ़ने के लिए एक-एक कंबल दिया गया है। ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल प्रशासन ने नए आए कैदियों की सुरक्षा और दूसरे कैदियों के साथ संभावित विवाद से बचने के लिए उन्हें अलग रखा है। जेल अधिकारी ने बताया कि दोनों को अपनी कोठरियों में अखबार पढ़ने और टीवी देखने की सुविधा भी दी जाएगी।

दाल, रोटी और सब्जी, आम कैदियों जैसी सुविधाएं

जेल अधिकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दूसरे विचाराधीन कैदियों से अलग सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उनके भोजन में दाल, रोटी और सब्जी शामिल है। दोनों की कोठरियों में अटैच्ड बाथरूम है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी आवाजाही सीमित रखी गई है। जेल प्रशासन ने दोनों नेताओं की कोठरियों के बाहर चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। अधिकारी ने बताया कि जेल के भीतर ब्लेडबाजी जैसी घटनाओं की आशंका रहती है। नए कैदियों को दूसरे विचाराधीन कैदियों की ओर से धमकाए जाने और उनसे पैसे वसूलने की कोशिश किए जाने का भी खतरा बताया गया है। तिहाड़ जेल में पहले भी कैदियों के बीच झड़प, मारपीट और धारदार वस्तुओं से हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं। जेल के भीतर जुगाड़ से बनाई गई नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल कर हमले किए जाने की खबरें भी आती रही हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद भेजे गए जेल

आशुतोष रांका और सौरभ दास को जंतर-मंतर पर जबरन प्रवेश करने के बाद दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस मुद्दे पर कई विपक्षी दलों ने भी पार्टी का समर्थन किया है।

तिहाड़ जेल में कैदियों की दिनचर्या कैसी होती है?

तिहाड़ जेल में कैदियों का दिन सुबह पांच बजे शुरू होता है। सुबह छह बजे हाजिरी ली जाती है और सात बजे नाश्ता दिया जाता है। दोपहर का भोजन सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच परोसा जाता है। इसके बाद कैदियों को आगंतुकों से मिलने के लिए निर्धारित समय मिलता है। रात का खाना शाम 6:30 बजे परोसा जाता है। इसके बाद कैदियों की गिनती पूरी होने पर शाम सात बजे उन्हें उनकी कोठरियों में बंद कर दिया जाता है।