नई दिल्ली में राहुल गांधी की चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी से जुड़े तर्क और SIR को लेकर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी तीखी टिप्पणी की।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के इतिहास और उसके अलग-अलग चुनावी रुझानों को सही तरीके से नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने एंटी-इनकंबेंसी को लेकर राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों में लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का उदाहरण दिया।
एंटी-इनकंबेंसी पर कांग्रेस का इतिहास गिनायासुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एंटी-इनकंबेंसी भारतीय राजनीति में कोई नया घटनाक्रम नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस को भी अलग-अलग राज्यों में लंबे समय तक सत्ता-विरोधी माहौल का सामना करना पड़ा है। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि 1967 के बाद कांग्रेस वहां दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी। इसी तरह उन्होंने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 1977 के बाद कांग्रेस वहां सत्ता में वापस नहीं आई। भाजपा ने राहुल गांधी के एंटी-इनकंबेंसी वाले तर्क के जवाब में इन्हीं उदाहरणों को प्रमुखता से रखा है।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब कांग्रेस लंबे समय तक देश की राजनीति में सत्ता में रही। सुधांशु त्रिवेदी ने उस दौर का उल्लेख करते हुए चुनावों में बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स लूटने और हिंसा जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में चुनावों के दौरान हिंसक घटनाएं होती थीं, लेकिन उस समय कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी उसी तरह प्रभावी नहीं हुई, जैसा राहुल गांधी अपने तर्क में बता रहे हैं।
कांग्रेस और गांधी परिवार पर भी निशानासुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभव और चुनावी क्षमता को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि पार्टी कई जगह सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर रही है।
उन्होंने रायबरेली और अमेठी का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी परिवार के इन पारंपरिक चुनावी क्षेत्रों में भी कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के समर्थन का लाभ मिला है। वायनाड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वहां मुस्लिम लीग के समर्थन से चुनाव जीते।
इन बयानों के आधार पर सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाया और कहा कि उन्हें भारतीय राजनीति की बुनियादी समझ नहीं है। ये टिप्पणियां भाजपा नेता की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ की गई राजनीतिक आलोचना हैं।
SIR और चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों का भी जवाबराहुल गांधी ने 24 सितंबर को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद का हवाला देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि वोटों में कथित हेरफेर का असर चुनाव के नतीजों और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीने की अवधि में कई मौकों पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने हालांकि इन आपत्तियों को अंतिम फैसलों में असहमति के रूप में पेश किए जाने पर सवाल उठाया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग टिप्पणियां या सुझाव होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
सुधांशु त्रिवेदी ने रिपोर्ट के आधार पर सवाल उठाएSIR और चुनाव आयोग को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी खबर में संबंधित व्यक्ति का पक्ष जानना पत्रकारिता की सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने सवाल किया कि जिस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें क्या किसी चुनाव आयुक्त का प्रत्यक्ष बयान मौजूद है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी चुनाव आयुक्त का कोई आधिकारिक कोटेशन या प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे दावों का आधार क्या है। उन्होंने इसी संदर्भ में मीडिया रिपोर्टों पर पूरी तरह निर्भर रहने को लेकर भी सवाल उठाया।
सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कहते हुए कहा कि किसी रिपोर्ट में सामने आए दावों और उनसे निकाले जा रहे निष्कर्षों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अगर बिना प्रत्यक्ष बयान या आधिकारिक पुष्टि के किसी रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का निष्कर्ष निकाला जाता है, तो उसके आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी के दावों पर भाजपा का राजनीतिक जवाबराहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा की ओर से केवल SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर ही प्रतिक्रिया नहीं आई, बल्कि उनके एंटी-इनकंबेंसी वाले तर्क को भी चुनौती दी गई। भाजपा ने कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों में लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का हवाला देकर यह तर्क रखा कि सत्ता-विरोधी राजनीति का इतिहास केवल भाजपा के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता।
इस पूरे विवाद में राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग और SIR को लेकर लगाए गए आरोप तथा भाजपा की ओर से उनका जवाब दोनों राजनीतिक दावों और प्रतिक्रियाओं के रूप में सामने आए हैं। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर SIR से जुड़े अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।