सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जीत करार देते हुए कहा कि यह शांतिपूर्ण जनआंदोलन, धैर्य और लगातार किए गए संघर्ष की सफलता का परिणाम है। वांगचुक लंबे समय से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे और इस मुद्दे पर उन्होंने लगातार आवाज बुलंद की थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने पहले नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया था। बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें सफदरजंग अस्पताल और फिर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां भी उनका अनशन जारी रहा। अंततः केंद्र सरकार के दो मंत्रियों के अनुरोध और बातचीत के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया था।
अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा, यह लोकतंत्र की जीत है। डायरेक्ट डेमोक्रेसी... सीधे सड़कों से। यह शांति, सब्र और लगन की जीत है। सीजेपी, देश के जेनजी को बधाई और डर तथा डर के माहौल को खत्म कर देश के हर कोने से उठ खड़े होने वाले सभी नागरिकों का धन्यवाद। अब जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने का समय है।
सोनम वांगचुक के इस बयान को उनके लंबे आंदोलन की परिणति के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि उनकी लड़ाई केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं थी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और व्यापक सुधार लागू कराने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य रही है। उनके अनुसार अब अगला कदम व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुनिश्चित करना होना चाहिए।