धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर संजय सिंह का बड़ा बयान, बोले- 'अब हर गलती की जवाबदेही तय होगी'

नई दिल्ली। नीट परीक्षा विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से जारी था। इस आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को तनाव और हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने छात्रों और देशभर के युवाओं को बधाई देते हुए इसे जनआंदोलन की बड़ी सफलता बताया है।

संजय सिंह बोले- युवा शक्ति ने सरकार को झुकने पर किया मजबूर

संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा, युवा शक्ति जिंदाबाद, छात्र शक्ति जिंदाबाद। जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। देश के करोड़ों युवाओं ने अपने आंदोलन के बल पर कुंभकरण की नींद में सो रही मोदी सरकार को जगाया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया। पेपर लीक से शुरू हुई यह लड़ाई अब रोजगार तक जाएगी। अब देश में हर गलती की जवाबदेही तय होगी। इस आंदोलन की जीत पर सभी को बधाई। जय हिंद।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि युवाओं की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की ताकत का प्रमाण भी है। उनके अनुसार देश के छात्रों ने यह दिखा दिया है कि शांतिपूर्ण और संगठित आंदोलन के जरिए बड़े फैसले भी कराए जा सकते हैं।
एक महीने से जारी था छात्रों का आंदोलन

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों और विभिन्न संगठनों का आंदोलन पिछले एक महीने से अधिक समय से जारी था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इस कार्रवाई में कई छात्र और युवा घायल हुए। इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया तथा देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होने लगे। धीरे-धीरे विपक्षी दलों ने भी आंदोलन का समर्थन किया, जिससे केंद्र सरकार पर राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव लगातार बढ़ता गया।

संसद में भी गूंजा शिक्षा मंत्री का मुद्दा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग केवल सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में लगातार हंगामे के कारण नियमित कार्यवाही प्रभावित रही और कई महत्वपूर्ण काम नहीं हो सके। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा।

अब संसद की कार्यवाही सामान्य होने की उम्मीद

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि संसद के मानसून सत्र की आगामी कार्यवाही पहले की तुलना में अधिक सुचारु रूप से चल सकेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और अधिक तेज हो सकती है। वहीं, विपक्ष भी इस घटनाक्रम को अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है।