राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत सभी नेता पुलिस हिरासत से रिहा, बोले- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को देना होगा इस्तीफा

नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्ष के सभी नेताओं को करीब तीन घंटे बाद रिहा कर दिया गया। आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस ने सभी नेताओं को छोड़ दिया। इस बीच दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की अहम बैठक भी हुई।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) देवेश श्रीवास्तव ने नई दिल्ली डीसीपी कार्यालय में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद पुलिस आयुक्त वहां से रवाना हो गए, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की चर्चा कुछ समय तक जारी रही।

तीन घंटे बाद खत्म हुई पुलिस हिरासत

विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को लगभग तीन घंटे तक पुलिस निगरानी में रखा गया। इसके बाद औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत कार्रवाई की थी। इसी प्रावधान के तहत उन्हें हिरासत में लेकर बाद में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर छोड़ दिया गया।

सोनिया गांधी भी पहुंचीं मंदिर मार्ग थाने


घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं। उस समय प्रियंका गांधी सहित विपक्ष के कई नेता वहीं मौजूद थे, जिन्हें लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था और बाद में थाने लाया गया था। सोनिया गांधी ने वहां पहुंचकर नेताओं की स्थिति की जानकारी ली।
क्या कहती है दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65?

दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए वैध और उचित निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है, उनका विरोध करता है या उनकी अनदेखी करता है, तो पुलिस अधिकारी उसे वहां से हटाने और बिना वारंट हिरासत में लेने का अधिकार रखता है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत प्रदर्शन कर रहे नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

रिहाई के बाद सचिन पायलट ने सरकार पर साधा निशाना

नेताओं की रिहाई के बाद कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता सहित लगभग 100 से 150 सांसद एक महत्वपूर्ण मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दिन पहले छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया और उन पर कथित लाठीचार्ज हुआ, उसकी कांग्रेस कड़ी निंदा करती है।

पायलट ने कहा कि सरकार और पुलिस की जो तस्वीर देश के सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जिस तरह जबरन हटाया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क का नाम 'लोक कल्याण मार्ग' है, तो जनता के हितों और युवाओं की आवाज उठाने के लिए राहुल गांधी का वहां मौजूद होना पूरी तरह उचित था।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की दोहराई मांग

सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना चाहिए था। इसके साथ ही छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जानी चाहिए और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मांगों पर विचार करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के लिए एक काला दिन साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह स्वीकार्य नहीं है। पायलट ने कहा कि देश के लोग न्याय चाहते हैं और कांग्रेस युवाओं तथा छात्रों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।