मोदी ने अगर लिया ट्रंप का नाम, तो सामने आ जाएगी पूरी सच्चाई, राहुल गांधी का तीखा हमला, ट्रेड डील पर भी कही यह बात

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए अचानक सीजफायर और 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला लगातार जारी है। हाल ही में लोकसभा में बयान देने के बाद, आज उन्होंने फिर दोहराया कि पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम इसलिए नहीं ले रहे, क्योंकि उन्हें डर है कि ट्रंप सारा सच सार्वजनिक कर देंगे।

राहुल गांधी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह दावा किया कि प्रधानमंत्री जानबूझकर ट्रंप का नाम नहीं ले रहे हैं। उनके मुताबिक, अगर पीएम ट्रंप का नाम लेते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति खुलकर सारी हकीकत सामने रख देंगे। “सबको पता है कि क्या हुआ है,” राहुल ने कहा।

मोदी कुछ नहीं बोल रहे क्योंकि सच्चाई डराती है – राहुल गांधी


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने साफ कहा, “प्रधानमंत्री ने न तो ट्रंप के बयान को झूठ कहा, न ही कोई स्पष्ट टिप्पणी की। वह कुछ नहीं बोल पा रहे, क्योंकि वो जानते हैं कि अगर एक बार ट्रंप ने बोलना शुरू किया, तो सारी परतें खुल जाएंगी।” राहुल के मुताबिक, यह चुप्पी खुद में बहुत कुछ कहती है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें देश के सामने पारदर्शिता के साथ सच बोलना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार इस विषय पर रहस्यमय रवैया अपनाए हुए है।

ट्रेड डील पर अमेरिका के दबाव की आशंका

राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ चल रही संभावित व्यापार संधि पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “अमेरिका इस समय भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है। ट्रंप वहां से दबाव बनाएंगे और आप देखना, कैसा समझौता निकलकर आता है।”

राहुल का मानना है कि यह सब कुछ सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि ‘डीलिंग’ का मामला है जिसमें पारदर्शिता की कमी है। उनकी नजर में यह मौन राजनीतिक मजबूरी नहीं, रणनीतिक डर का संकेत है।

प्रियंका गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

इस विवाद पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री दोनों विषय से बचते नजर आ रहे हैं। उन्हें साफ शब्दों में कहना चाहिए कि ट्रंप का दावा झूठा है, लेकिन उन्होंने गोलमोल जवाब दिया।”

प्रियंका ने सवाल उठाया कि अगर सरकार में हिम्मत है तो वह सार्वजनिक रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति को गलत ठहराए, लेकिन ऐसा न होना यह दिखाता है कि सच को छिपाने की कोशिश हो रही है।

एस. जयशंकर की सफाई: कोई तीसरा पक्ष नहीं

कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बयान दिया कि भारत-पाकिस्तान सीजफायर में किसी भी बाहरी ताकत की भूमिका नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा, “इसका सवाल ही नहीं उठता कि किसी तीसरे पक्ष ने मध्यस्थता की हो। यह पूरी तरह भारत की नई नीति के तहत लिया गया निर्णय था।”

जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 16 जून के बीच कोई भी फोन पर बातचीत नहीं हुई। उन्होंने बताया कि सैन्य कार्रवाई को रोकने का अमेरिका से व्यापार या किसी कूटनीतिक दबाव से कोई लेना-देना नहीं था।

प्रधानमंत्री का जवाब: किसी नेता ने हस्तक्षेप नहीं किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को लोकसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने दो टूक कहा, “दुनिया के किसी भी नेता ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए कोई सुझाव नहीं दिया था। यह पूरी तरह भारत का आंतरिक और स्वतंत्र निर्णय था।”

ट्रंप की लगातार दावेदारी और भारत की खंडन नीति

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर में उनकी भूमिका थी। उन्होंने अलग-अलग मौकों पर कहा है कि उनके प्रयासों की वजह से यह मुमकिन हो सका।

हालांकि भारत सरकार का स्टैंड शुरू से ही स्पष्ट रहा है — भारत और पाकिस्तान के आपसी फैसलों में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं है। विदेश मंत्रालय ने भी बार-बार यही बात दोहराई है कि सीजफायर भारत की रणनीतिक योजना का हिस्सा था, न कि किसी विदेशी हस्तक्षेप का नतीजा।