‘दिल्ली को जेल क्यों बना दिया?’ राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, प्रदर्शनकारियों को रोकने पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च से पहले केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वोट चोरी के खिलाफ पिछले चार-पांच दिनों से दिल्ली में चल रहा जनआंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे वर्षों से जारी विरोध की भावना है। राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को आने से रोकने, ट्रेनों और बसों में लोगों को उतारे जाने तथा महिलाओं के साथ मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली को जेल की तरह क्यों बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ दिनों तक चलने वाला विरोध नहीं है। उनके मुताबिक, पिछले 10-12 वर्षों से प्रतिरोध जारी है, लेकिन अब वह खुलकर सामने आ रहा है। उन्होंने ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ को ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि इस संघर्ष को एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

दिल्ली को किले में बदलने का राहुल गांधी का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेनों और बसों को रोका जा रहा है तथा यात्रियों को रास्ते में उतारा जा रहा है। उनके अनुसार, राजधानी में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और करीब 20 से 30 हजार पुलिसकर्मी सड़कों पर मौजूद हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की कार्रवाई के बावजूद विपक्ष की रणनीति अलग है। उनका कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती से लोगों को यह देखने का मौका मिल रहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ किस तरह पेश आ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों के बीच इस कार्रवाई को लेकर असहजता है और कुछ पुलिसकर्मी सवाल उठा रहे हैं कि युवाओं को क्यों पीटा जा रहा है।

महिलाओं पर हमले और पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ मारपीट की जा रही है। उन्होंने इसके लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया। राहुल गांधी के मुताबिक, एक ओर पुलिस से देशभक्त युवाओं को पीटने के लिए कहा जा रहा है, जबकि दूसरी ओर आरएसएस से जुड़े लोगों को छोड़ देने की बात हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों का एक हिस्सा भी प्रदर्शनकारियों के विरोध में की जा रही कार्रवाई को सही नहीं मानता। राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस पर दबाव की स्थिति है और प्रदर्शन को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे जनता के सामने आने देना विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। ये सभी आरोप राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर भाजपा, आरएसएस या दिल्ली पुलिस का पक्ष शामिल नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने जाएंगे राहुल गांधी

राहुल गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने विपक्ष के नेता से मिलने से इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, उन्हें याचिका दाखिल करने के लिए कहा गया है। इसी के तहत राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता सुप्रीम कोर्ट जाकर याचिका दाखिल करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में उन्हें रोके जाने की आशंका है, लेकिन आंदोलन किसी एक दिन की घटना नहीं है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि विरोध कई वर्षों से जारी है और अब उसका खुला स्वरूप दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, याचिका दाखिल करने की पहल भी इसी संघर्ष का हिस्सा है।

‘मोदी सरकार के 200 अधिकारी हमें जानकारी दे रहे हैं’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी उन्हें जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की थकान और दबाव की चर्चा हो रही है, लेकिन उनके मुताबिक पुलिसकर्मी भी खुद से सवाल कर रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार जैसे व्यक्ति को क्यों बचाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, युवा पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से डरने की जरूरत नहीं होने की बात कही और दावा किया कि सरकार की व्यवस्था भीतर से कमजोर हो रही है। हालांकि, उन्होंने जिन 200 अधिकारियों के संपर्क में होने की बात कही, उनके नाम या उनके द्वारा दी जा रही जानकारी का विस्तृत ब्योरा इस सामग्री में नहीं दिया गया है।
बच्चों और लड़कियों को डराने का भी आरोप

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार बच्चों को डरा रही है और लड़कियों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को केवल सड़क पर होने वाले प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह लोगों के मन में मौजूद डर और सरकार के प्रति धारणा से जुड़ी लड़ाई भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार का पक्ष सही है, तो उसे सबूत सामने रखने चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी बताया कि विपक्ष राष्ट्रपति के पास गया था और उनसे सबूत मांगे गए थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष सबूत देने के लिए तैयार है। राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि यह लड़ाई कई मोर्चों पर लड़ी जा रही है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों से पूछा कि कितने लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कर रहे हैं, वह सही है। राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली में बैरिकेडिंग के बावजूद लोगों के विचारों को बंद नहीं किया जा सकता।

ज्ञानेश कुमार से राहुल गांधी की इस्तीफे की अपील

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संदेश मिलने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि संदेश आते हैं और ज्ञानेश कुमार उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी देख रहे होंगे। इसके बाद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से सीधे इस्तीफा देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा, “आप अप्रूवर बन जाइए।” उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार मुख्य अपराधी नहीं हैं और उनसे गलती हुई है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि वह इस्तीफा देकर अपनी बात रखते हैं, तो उन्हें माफ किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि ज्ञानेश कुमार पर दबाव हो सकता है और विपक्ष क्रूर नहीं है। ये टिप्पणियां राहुल गांधी के आरोपों और राजनीतिक अपील का हिस्सा हैं। सामग्री में ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

‘यह शिव जी का तांडव है, शिव की बारात में कोई भी आ सकता है’

आंदोलन की रणनीति और उसके योजनाबद्ध न होने से जुड़े सवाल पर राहुल गांधी ने इसे भगवान शिव के तांडव और शिव की बारात से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि यह शिव जी का डांस है और शिव की बारात में कोई भी शामिल हो सकता है। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा की तुलना भी शिव की बारात से की। उन्होंने कहा कि सभी विरोध प्रदर्शनों को एक ही व्यापक विरोध का हिस्सा समझा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार से बातचीत होती है, लेकिन उनसे सीधे बातचीत नहीं होती; सरकार अन्य लोगों से बात करती है, जबकि वह अपनी बात खुलकर सामने रखते हैं। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य संदेश यही रहा कि विपक्ष वोट चोरी के आरोपों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगा और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने, पुलिस की कार्रवाई और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।