जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को बुधवार, 14 अक्टूबर को अदालत में पेश किए जाने के बाद हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। उन्हें तिहाड़ जेल भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। इस कार्रवाई पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके महाराष्ट्र से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। इस मामले में पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में इन नेताओं को हिरासत में लिया था। इसके बाद से ही प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद तेज हो गया है।
राहुल गांधी बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तिरंगा लहराना अपराध नहींCJP नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने और ऐसा करने वाले युवाओं को जेल भेजने पर सवाल उठाए। राहुल गांधी का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध करना और राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध नहीं है। उन्होंने इसके लिए युवाओं को जेल में डालने की कार्रवाई को कायरता बताया। अपने संदेश में राहुल गांधी ने छात्रों, युवाओं, पत्रकारों और INDIA गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही सभी अलग-अलग बैनर के तहत अपनी बात रख रहे हों, लेकिन उनकी मांग एक है। उन्होंने प्रदर्शन को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और जंतर-मंतर को जनता के लिए फिर से हासिल करने की बात कही। उनका संदेश था कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार लेकर रहेंगे। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। CJP और विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति जताने और शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए जगह मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, पुलिस ने अपनी कार्रवाई के पीछे स्थल पर लागू प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला दिया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे CJP नेताइस पूरे विवाद की शुरुआत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है। CJP और विपक्ष से जुड़े समूह इस मांग के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जारी आदेश के जरिए जंतर-मंतर रोड को अधिकृत प्रदर्शन स्थल के दर्जे से हटा दिया। इसके बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों के तौर पर चिह्नित किया गया। इसके बावजूद मंगलवार, 13 अक्टूबर को CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने कुछ समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने बंद गेट और बैरिकेड पार करके प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया। इस दौरान तिरंगा लहराया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने तीनों नेताओं को हिरासत में ले लिया।
सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासतहिरासत में लिए गए नेताओं को बुधवार सुबह मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। दोनों को तिहाड़ जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने मामले में कथित अतिक्रमण, निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने जैसे आरोप लगाए हैं। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका ने शनिवार को हुई पिछली हिरासत के बाद एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस ने ताजा मामले में बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप भी शामिल किया है। हालांकि, CJP के कानूनी प्रतिनिधियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि उसके नेताओं ने केवल तिरंगा लहराया और देशभक्ति के नारे लगाए थे। इस तरह, एक ही घटना को लेकर पुलिस और पार्टी की ओर से अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। फिलहाल, नेताओं को हिरासत में भेजने के मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप और पार्टी की आपत्ति दोनों चर्चा में हैं।
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र से दिल्ली के लिए रवाना
CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी आंदोलन में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र से दिल्ली रवाना हो गए हैं। उन्होंने पहले ही घोषणा की थी कि वह बुधवार को दिल्ली पहुंचेंगे और प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। दीपके ने चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें रास्ते में रोका गया, तो वह उसी जगह से विरोध प्रदर्शन शुरू कर देंगे। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक के खिलाफ आंदोलन जारी रखने और देशभर में विरोध प्रदर्शन खड़े करने की बात भी कही है। अब सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत, राहुल गांधी के समर्थन संदेश और अभिजीत दीपके के दिल्ली रवाना होने के बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।