प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से जापान और चीन की द्वि-देशीय यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा में पहले वह जापान जाएंगे और उसके बाद चीन का दौरा करेंगे। इस यात्रा की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लागू किए जाने के बाद यह दौर काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
जापान यात्रा के दौरान पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 29 और 30 अगस्त को जापान में रहने वाले पीएम मोदी और जापानी पीएम पहली बार शिखर वार्ता करेंगे, हालांकि मोदी इससे पहले आठ बार जापान की यात्रा कर चुके हैं। इस वार्ता में भारत-जापान के बीच रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी की समीक्षा होगी। इसमें रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा 31 अगस्त और 1 सितंबर को होगी। वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान, मोदी अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी शामिल होंगे।
इससे पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर राष्ट्रपति शी का संदेश और शिखर सम्मेलन का निमंत्रण सौंपा। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी मौजूद रहे और प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी बातचीत हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया और सीमा विवादों के स्वीकार्य निपटान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को SCO शिखर सम्मेलन के लिए धन्यवाद दिया और अपनी स्वीकृति व्यक्त की। इस यात्रा के दौरान भारत और चीन के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलने की संभावना है।