लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि 26 बेगुनाह लोगों की निर्मम हत्या उनके परिजनों के सामने कर दी गई और सरकार मौन तमाशबीन बनी रही। प्रियंका गांधी ने सवाल किया कि जब ये लोग सरकार पर भरोसा करके वहां घूमने गए थे, तो उनकी जान की हिफाज़त क्यों नहीं की गई? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया।
प्रियंका ने हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनकी पत्नी के बयान ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने पीड़ित परिवार की वेदना को लोकसभा में रखते हुए कहा, “शुभम अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ छुट्टियां मनाने गए थे, लेकिन उनका सपना वहीं टूट गया। ऐसा भयानक दृश्य कि पत्नी ने अपनी आंखों के सामने अपने जीवनसाथी को मरते देखा।”
'कश्मीर में अमन का झूठा दावा'प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार और मीडिया पर यह कहते हुए निशाना साधा कि बार-बार कश्मीर में शांति और सामान्य हालात की तस्वीर पेश की जाती रही है। उन्होंने कहा, “सरकार ने लगातार यह दिखाने की कोशिश की कि अब घाटी सुरक्षित है और पर्यटक बिना डर के आ सकते हैं। इसी भ्रम में शुभम और उनकी पत्नी भी वहां पहुंचे थे, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट थी।”
'एक घंटे तक कोई मदद नहीं पहुंची'प्रियंका गांधी ने लोकसभा में घटना के दिन की भयावहता को उजागर करते हुए बताया कि 22 अप्रैल को बैसारन वैली में सैकड़ों पर्यटक मौजूद थे, और वहीँ चार आतंकवादी अचानक जंगल से निकले और अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। “शुभम को उनकी पत्नी के सामने गोली मार दी गई। आतंकियों ने एक-एक कर निर्दोषों को निशाना बनाया। कोई अपनी पत्नी के सामने मारा गया, कोई अपने बच्चे के सामने। और इतने लंबे समय तक—करीब एक घंटे तक—कोई सुरक्षा बल मौके पर नहीं पहुंचा।”
उन्होंने आगे शुभम की पत्नी का बयान साझा करते हुए कहा, “मैंने अपनी पूरी दुनिया को टूटते हुए देखा। वहां कोई सुरक्षा नहीं थी। मेरी अपनी सरकार ने मुझे अनाथ बना दिया।” प्रियंका ने कटाक्ष किया कि अगर हर दिन 1000 से ज्यादा लोग बैसारन वैली जा रहे हैं, तो क्या सरकार को वहां पर्याप्त सुरक्षा नहीं देनी चाहिए थी?
'क्या सुरक्षा की जवाबदेही शीर्ष नेतृत्व की नहीं?'प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं पर सीधा सवाल दागते हुए कहा, “क्या इन पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री की नहीं थी? आखिर ये लापरवाही क्यों हुई?” उन्होंने कहा कि आम लोग सरकार पर विश्वास करके घूमने निकलते हैं, लेकिन जब सरकार उनकी रक्षा करने में असफल हो जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा?
रक्षा मंत्री और राज्यपाल के विरोधाभासी बयानप्रियंका ने लोकसभा में यह भी याद दिलाया कि इस हमले से कुछ दिन पहले ही रक्षा मंत्री ने कश्मीर का दौरा किया था और वहां की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की थी। उस वक्त उन्होंने कहा था, “हमने आतंकवाद पर जीत हासिल कर ली है।” लेकिन इसी के कुछ महीने बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने स्वयं यह स्वीकार किया कि “पहलगाम हमले में गंभीर चूक हुई थी।”