सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कोलकाता गैंगरेप मामला, वकील ने CBI जांच और पीड़िता को 50 लाख मुआवज़े की मांग की

कोलकाता के लॉ कॉलेज में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता पकड़ ली है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है, जहां वरिष्ठ वकील सत्यम सिंह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इसकी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। वकील ने न सिर्फ घटना की गंभीरता पर चिंता जताई है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता के बीच इस केस को निष्पक्ष तरीके से देखने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

सुप्रीम कोर्ट को पत्र, न्याय की अपील


सत्यम सिंह द्वारा लिखे गए इस पत्र में उन्होंने न केवल CBI जांच की मांग की है, बल्कि पीड़िता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और उसके परिवार को सरकारी सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक लड़की के साथ हुई दरिंदगी का नहीं, बल्कि देश की न्यायिक और सामाजिक व्यवस्था की परीक्षा है।

शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा की नई पहल की मांग


सत्यम सिंह ने अपने पत्र में केवल न्यायिक कार्रवाई की ही नहीं, बल्कि व्यापक संस्थागत सुधार की भी मांग की है। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य CCTV निगरानी, महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था को अनिवार्य करने की बात कही है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल सज़ा से नहीं रुकेंगी, बल्कि रोकथाम की ठोस व्यवस्था से ही इन पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

'अपराजिता विधेयक' लागू करने की मांग

वकील ने पश्चिम बंगाल में यौन अपराधों को लेकर मौजूदा कानूनों की कमज़ोरी की ओर इशारा करते हुए 'अपराजिता विधेयक' को तुरंत लागू करने की मांग की है। यह विधेयक राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर अधिक कड़े प्रावधानों के लिए प्रस्तावित किया गया है, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया।

राजनीतिक बयानबाज़ी से और भड़का मामला

इस बीच, इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर टीएमसी के नेताओं की ओर से की गई विवादास्पद टिप्पणियां भी मामले को और पेचीदा बना रही हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, अगर दोस्त ही दोस्त का रेप कर दे, तो क्या किया जा सकता है? वहीं, टीएमसी नेता मदन मित्रा ने कहा कि यदि पीड़िता सतर्क रहती या किसी को साथ ले जाती, तो यह घटना नहीं होती। इन बयानों ने सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है।

ममता बनर्जी ने भेजा कारण बताओ नोटिस

टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मदन मित्रा की टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है और तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी के भीतर से ही ऐसे बयानों की आलोचना हो रही है, जिससे यह साफ होता है कि मामला अब केवल अपराध का नहीं, बल्कि राजनीतिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भी बन गया है।

घटना की पृष्ठभूमि

यह घटना 25 जून को घटी थी, जब कोलकाता के एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ कॉलेज परिसर में ही तीन युवकों ने मिलकर गैंगरेप किया। तीनों आरोपी उसी कॉलेज के छात्र हैं, जिनमें से एक पूर्व छात्र और टीएमसी समर्थक बताया जा रहा है। सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन घटना को लेकर देशभर में भारी आक्रोश है।

कोलकाता गैंगरेप केस अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई बहस को जन्म दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग और जनप्रतिनिधियों के गैर-जिम्मेदार बयानों को लेकर उठी प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि यह मामला केवल अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा हर पक्ष हमारी सामाजिक, राजनीतिक और संस्थागत जिम्मेदारियों की कसौटी पर है। अब देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में इस केस में न्याय की नई मिसाल कायम हो पाएगी।