कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, डीएमके नेता एमके स्टालिन, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने दोनों नेताओं के समर्थन में बयान दिए। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इन नेताओं का आभार जताया। यह विवाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ, जहां CJP के नेताओं ने प्रतिबंध के बावजूद पहुंचकर तिरंगा फहराया था। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में सौरव दास तथा आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, राष्ट्रीय ध्वज और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी।
अभिजीत दीपके ने विपक्षी नेताओं को कहा धन्यवादसौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में बयान दिए। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राहुल गांधी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल, आदित्य ठाकरे और अभिषेक बनर्जी समेत इन नेताओं के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। इस घटनाक्रम के बीच इंडिया गठबंधन, CJP और कुछ अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। संदर्भ के मुताबिक, ये दल उनके इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। अलग-अलग मुद्दों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच विपक्षी नेताओं ने CJP के सदस्यों की गिरफ्तारी को लेकर एकजुटता दिखाई है।
राहुल गांधी बोले- तिरंगा लहराना अपराध नहींलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने की कार्रवाई को कायरतापूर्ण बताया। राहुल गांधी ने कहा कि अलग-अलग बैनर के तहत प्रदर्शन करने वाले लोगों का मकसद एक है और वे अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर को भारत की जनता का स्थल बताते हुए कहा कि इसे फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल किया जाएगा। उनके बयान का मुख्य जोर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर देने पर था। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया विपक्ष की ओर से सामने आए प्रमुख बयानों में शामिल रही।
एमके स्टालिन ने युवाओं की आवाज दबाने पर उठाए सवालडीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले सकती है और भारतीय जनता पार्टी कितने युवाओं की आवाज दबा पाएगी। स्टालिन ने कहा कि युवाओं को जितनी अधिक संख्या में जेल भेजा जाएगा, उतने ही अधिक आम नागरिक सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नागरिकों का किसी राजनीतिक दल से संबंध होना जरूरी नहीं है और वे सरकार को जनता की ताकत दिखा सकते हैं। उनका बयान प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में था। स्टालिन ने अपने संदेश के जरिए कहा कि हिरासत की कार्रवाई से विरोध की आवाज को पूरी तरह दबा पाना संभव नहीं होगा।
अरविंद केजरीवाल ने पूछा- अपना झंडा फहराना अपराध कैसे?
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध है। केजरीवाल ने इस स्थिति को बेतुका बताया। उनकी प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे पर केंद्रित रही कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद CJP नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई क्यों की गई। गिरफ्तारी के बाद विपक्षी नेताओं के बयानों में राष्ट्रीय ध्वज और विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
आदित्य ठाकरे बोले- युवाओं का तिरंगा फहराना अपराध कब से?शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजे जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए दोनों नेताओं को जेल में डाल दिया गया। आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि अपने ही देश में भारतीय युवाओं के लिए राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध कब से बन गया। उन्होंने कहा कि सरकार और देशभक्त युवाओं के बीच यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक लोकतंत्र को कथित तानाशाही से वापस नहीं पा लिया जाता। उनकी टिप्पणी में गिरफ्तारी को लेकर असहमति और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग प्रमुख रही।
अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए जो खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताते हैं, लेकिन उनके मुताबिक भारतीयों को अपने ही देश में तिरंगा फहराने के लिए गिरफ्तार किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि केंद्र सरकार इस तरह के काम को शांति भंग करने जैसा मान रही है। उन्होंने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना पाकिस्तान से करते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी भी की। यह बयान विपक्षी नेताओं की उन प्रतिक्रियाओं का हिस्सा था, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की गई।
क्या है पूरा मामला? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पहुंचे थे CJP नेताविवाद की शुरुआत दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद हुई। संदर्भ के मुताबिक, सरकार ने दिल्ली पुलिस के माध्यम से जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किया था। इसके विरोध में CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पहुंचे। उनके साथ कुछ कार्यकर्ता भी मौजूद थे। बताया गया कि समूह ने गेट पार करके परिसर में प्रवेश किया और वहां तिरंगा फहराया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसी कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने बयान जारी कर गिरफ्तारी का विरोध किया और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। इस पूरे मामले में एक ओर पुलिस की कार्रवाई और जंतर-मंतर पर लागू प्रतिबंध का मुद्दा है, तो दूसरी ओर विपक्षी नेताओं ने तिरंगा फहराने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सरकार की आलोचना की है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थन में बयान देने वाले नेताओं का धन्यवाद किया है।