CEC ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर कांग्रेस और BJP के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा है कि पार्टी SIR विवाद को लेकर अपनी तीन प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगी। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराना शामिल है।
खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी इन मुद्दों को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन मुद्दों पर आंदोलन कर रहे सिविल सोसाइटी के सदस्यों और युवा संगठनों के साथ कांग्रेस खड़ी है।
खरगे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत रखीं तीन मांगेंकांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग SIR प्रक्रिया को रद्द करने की है, जबकि तीसरी मांग चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराने की है।
खरगे ने कहा कि इन तीनों मुद्दों को लेकर कांग्रेस और INDIA गठबंधन से जुड़े कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। उन्होंने सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों की ओर से किए जा रहे आंदोलनों का भी समर्थन किया।
खरगे ने दिल्ली में महिला पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी के आरोपों को लेकर भी सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ कथित उत्पीड़न निंदनीय है। इसी बयान में उन्होंने सरकार पर ध्यान भटकाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
दिल्ली प्रदर्शन और महिला पत्रकारों की शिकायत पर पुलिस का पक्षSIR के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने अलग पक्ष रखा है। DCP नेहा यादव के मुताबिक नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद AISA और अन्य संगठनों ने 3 अक्टूबर को प्रदर्शन किया।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों को BNSS की धारा 163 के प्रावधानों के बारे में बताया गया और वहां से हटने के लिए कहा गया। पुलिस का कहना है कि निर्देश नहीं मानने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
DCP ने बताया कि शाम करीब 6 बजे खुद को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने हिरासत में लिए जाने के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए शिकायत दी। पुलिस के मुताबिक शिकायतें दर्ज की गईं, महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया और सभी शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेज दी गईं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके पास इस घटना से संबंधित कोई वीडियो फुटेज है तो उसे क्राइम ब्रांच के साथ साझा किया जाए।
DMK ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए सवालSIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाए जा रहे हैं। DMK प्रवक्ता TKS एलंगोवन ने ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें BJP के पक्ष में काम करने वाला बताया और कहा कि वह निष्पक्ष व्यक्ति नहीं हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष लगातार SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है।
BJP का पलटवार- चुनाव हारने पर EVM और चुनाव आयोग पर सवालविपक्ष के आरोपों पर BJP ने भी पलटवार किया है। BJP का कहना है कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद अक्सर EVM या चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराता है।
तेलंगाना BJP अध्यक्ष रामचंदर राव ने कहा कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो उसे चुनाव प्रक्रिया ठीक लगती है, लेकिन हारने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं।
NDA में शामिल JD(U) के बिहार अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर चुनाव आयोग यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाया गया है तो उससे संबंधित विवरण आयोग के सामने लाया जा सकता है।
फडणवीस ने SIR की प्रक्रिया का किया बचावमहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी SIR को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन भारतीय चुनाव व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया है और चुनाव आयोग अलग-अलग समय पर मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करता रहा है।
फडणवीस ने अपने पोस्ट में 1952 और 1956 के बीच देश के ज्यादातर हिस्सों में SIR किए जाने का उल्लेख किया। उनके मुताबिक इसके बाद 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी कई क्षेत्रों में मतदाता सूची का रिवीजन किया गया। उन्होंने 1983-84, 1987-89, 1992, 1993 और 1995 में हुए रिवीजन का भी जिक्र किया।
उनके मुताबिक चुनाव आयोग ने 2002, 2003 और 2004 में भी मतदाता सूचियों को दोबारा रिवाइज किया था।
घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटाने का किया उल्लेखफडणवीस ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी जुटाता है। इसके तहत वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म यानी एन्यूमरेशन फॉर्म एकत्र किए जाते हैं और मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि व्यापक रिवीजन की प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी के आधार पर वोटर लिस्ट को दोबारा तैयार किया जाता है। उनके मुताबिक शहरीकरण और लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने की वजह से मतदाता सूची में समय के साथ बड़े बदलाव होते हैं। पिछले 20 वर्षों में भी बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची में जोड़े और हटाए गए हैं।
फडणवीस ने यह भी कहा कि नए पात्र मतदाताओं के जुड़ने, मतदाताओं की मृत्यु, माइग्रेशन और दूसरे स्थान पर रजिस्ट्रेशन जैसी वजहों से वोटर लिस्ट लगातार बदलती रहती है। इसलिए समय-समय पर पूरी तरह सत्यापन जरूरी है। उन्होंने कहा कि योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और किसी पात्र नागरिक को सूची से बाहर नहीं करना चुनाव आयोग के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
उनके अनुसार कॉम्प्रिहेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने की लंबे समय से चली आ रही चुनावी प्रक्रिया है और मौजूदा SIR इसी व्यापक प्रक्रिया का अगला चरण है।
दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन, कांग्रेस ने बुलाई बैठकCEC और SIR को लेकर दिल्ली और मुंबई में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस ने आगे की रणनीति तय करने के लिए बैठक भी बुलाई है। इसमें SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर पार्टी के अगले कदम पर चर्चा की जाएगी।
SIR को लेकर मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में 23 अगस्त से एक नया राजनीतिक विवाद भी जुड़ा। उस समय इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया के दौरान कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए।
फिलहाल एक ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी SIR को रद्द करने तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य बदलावों की मांग पर कायम हैं, वहीं BJP और NDA के नेता SIR को मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया बताते हुए इसका बचाव कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार जारी है।