केजरीवाल का PM मोदी पर तीखा हमला, अडानी को बताया ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’, बोले- 12 साल में सबसे ज्यादा कमाई इन्होंने की

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए केजरीवाल ने मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल, कथित भाई-भतीजावाद, राजनीतिक दलों में टूट और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों से लेकर चुनाव आयोग और SIR तक पर अपनी बात रखी। उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी और जय शाह का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

केजरीवाल ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तब लोगों को उम्मीद थी कि एक नया चेहरा और नई ऊर्जा देश में बदलाव लाएगी। उनके मुताबिक उस समय यह भी कहा जाता था कि प्रधानमंत्री के परिवार में आगे-पीछे कोई नहीं है, इसलिए उनसे भाई-भतीजावाद खत्म करने की उम्मीद थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति इसके उलट है और प्रधानमंत्री खुद भाई-भतीजावाद का उदाहरण बन गए हैं।

अडानी और जय शाह को लेकर केजरीवाल का दावा

केजरीवाल ने अपने संबोधन में गौतम अडानी को प्रधानमंत्री मोदी का ‘भाई’ बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में अगर किसी एक व्यक्ति ने सबसे ज्यादा पैसा कमाया है तो वह अडानी हैं। उन्होंने जय शाह का भी जिक्र किया और उन्हें प्रधानमंत्री का ‘भतीजा’ बताया।

केजरीवाल का दावा था कि पिछले 12 वर्षों में किसी युवा ने अगर सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह जय शाह हैं। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि उनके मुताबिक इतिहास में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को भाई-भतीजावाद की बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जाएगा।

ये सभी बातें केजरीवाल ने अपने संबोधन के दौरान आरोप और राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर कहीं।

‘12 साल में लोगों को क्या मिला?’

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस दौरान आम लोगों को क्या मिला। उन्होंने इसके लिए मीडिया की भूमिका को भी आंशिक रूप से जिम्मेदार बताया।

राजनीतिक दल बदलने के मुद्दे पर उन्होंने 1980 के दशक का उदाहरण दिया। केजरीवाल के मुताबिक उस दौर में विधायक या नेता पैसे अथवा किसी अन्य वजह से पार्टी बदलते थे तो इसे अनैतिक माना जाता था। उनका कहना था कि उस समय दल बदलने वाले नेताओं के साथ-साथ उन्हें खरीदने वालों को भी गलत नजर से देखा जाता था और इसी दौर में दल-बदल विरोधी कानून की जरूरत सामने आई।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आज बड़े पैमाने पर विधायकों और सांसदों के दल बदलने तथा सरकारें गिराने की घटनाओं को अलग नजर से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में ‘चाणक्य’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनके मुताबिक यह चाणक्य की विचारधारा से मेल नहीं खाता।

विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी हमला

केजरीवाल ने अपने संबोधन में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 120 विधायकों की खरीद-बिक्री हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर विधायकों को खरीदा और बेचा जा रहा है तथा सरकारों को गिराने के लिए ईडी, सीबीआई और पैसे का इस्तेमाल किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें ‘चाणक्य’ नहीं कहा जाना चाहिए। केजरीवाल ने मीडिया से भी ऐसे नेताओं को इस तरह पेश नहीं करने की अपील की और इसे बेईमानी तथा देश के साथ गद्दारी बताया।
‘ईडी-सीबीआई दे दो, 24 घंटे में सरकार गिरा देंगे’

केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत करियर के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने बताया कि वह इनकम टैक्स विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर थे, लेकिन नौकरी छोड़कर झुग्गियों में रहने लगे और करीब 10 साल तक वहां काम किया।

उन्होंने कहा कि लोगों को उनके मुख्यमंत्री बनने, अन्ना आंदोलन और दिल्ली की सरकारों में उनकी भूमिका के बारे में पता है, लेकिन झुग्गियों में बिताए गए उनके 10 वर्षों के बारे में उतनी जानकारी नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा व्यक्तिगत नहीं थी और शुरुआत से उनका लक्ष्य देश से जुड़ा रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोकपाल आंदोलन के समय लोकपाल कानून बना दिया गया होता तो आम आदमी पार्टी बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल

केजरीवाल ने SIR के मुद्दे पर भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस और पत्रकार रतिका चोपड़ा के काम की सराहना की। केजरीवाल के मुताबिक मौजूदा माहौल में सरकार के खिलाफ बोलना आसान नहीं है और ऐसे समय में सामने आई रिपोर्ट ने उन बातों को सबूतों के साथ सामने रखा, जो पहले दबे स्वर में कही जाती थीं।

उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे कुछ अधिकारियों के पास बिना पर्याप्त जांच के देशभर में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की शक्ति है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस तरह की व्यवस्था लोकतंत्र के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।

केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को चुनाव के जरिए अपनी सरकार बदलने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में इस अधिकार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने 2 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित विरोध का भी जिक्र किया और उम्मीद जताई कि इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना पड़ेगा तथा लोगों को SIR से राहत मिलेगी।

मोदी सरकार के 12 साल पर केजरीवाल ने गिनाईं कमियां

केजरीवाल ने कहा कि किसी भी देश के इतिहास में 12 साल का समय कम नहीं होता। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को मिली सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को देश के विकास के लिए पर्याप्त अवसर मिले थे।

उनका आरोप था कि इन वर्षों में देश को दुनिया का नंबर एक देश बनाने की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ। उन्होंने विदेश नीति और प्रधानमंत्री के दूसरे देशों के नेताओं के साथ संबंधों को लेकर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में प्रधानमंत्री के रवैये पर सवाल उठाए।

केजरीवाल ने चीन को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि चीन भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ता जा रहा है। उन्होंने विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों का जिक्र करते हुए सरकार पर कई सेक्टरों की स्थिति खराब करने का आरोप लगाया।

बैंकिंग से लेकर एयरलाइंस तक कई सेक्टरों का किया जिक्र

केजरीवाल ने बैंकिंग, रेलवे और एयरलाइंस समेत कई क्षेत्रों को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की। एयरलाइंस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब केवल इंडिगो और एयर इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां बची हैं, जबकि पहले यात्रियों के पास कई एयरलाइंस के विकल्प होते थे।

उन्होंने सरकार के पुराने नारे ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार और आर्थिक विकास को लेकर भी हमला बोला। केजरीवाल ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल और मौजूदा सरकार के 12 वर्षों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री और उनकी टीम पर देश को लूटने का आरोप लगाया।

केजरीवाल ने अपने पूरे संबोधन में राजनीतिक दलों में टूट, विधायकों की खरीद-फरोख्त, चुनाव प्रक्रिया, SIR, मीडिया और सरकार की नीतियों जैसे मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।