गंभीर आरोपों में पद से हटाने वाले बिल पर मैंने खुद इस्तीफा दिया था: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर यदि 5 साल से अधिक की सजा के प्रावधान वाला केस लगे तो उन्हें अपने पद से हटना होगा। इस विधेयक को लेकर सदन में तीखी बहस हुई और कांग्रेस, सपा, आरजेडी के सांसदों ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ करार दिया। इसके अलावा, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसका विरोध किया। अमित शाह ने इस विवाद के बीच खुद का उदाहरण साझा करते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और जिम्मेदारी से भागा नहीं जा सकता।

अमित शाह का खुद का उदाहरण

अमित शाह ने बताया, “गुजरात में जब मैं मंत्री था, तब मुझ पर कुछ आरोप लगे। मैंने तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे दिया और अदालत के आदेशों का पालन किया। इसके बाद ही मैंने दोबारा जिम्मेदारी संभाली, जब आरोपों से मुक्त हुआ और संविधान के तहत पद हासिल करने का अधिकार प्राप्त हुआ।” उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक देश में भ्रष्टाचार रोकने और राजनीति में शुचिता को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम साबित होगा। कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल को जल्दबाजी में लाए जाने का आरोप लगाया, जिस पर अमित शाह ने कहा कि यह बिल संयुक्त समिति के समक्ष भी भेजा जाएगा।

ममता बनर्जी का विरोध और सदन में हंगामा

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी विधेयक का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विपक्षी सरकारों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और देश में लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है। ममता ने इसे “सुपर इमरजेंसी” की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। इसके अलावा, लोकसभा में कुछ विपक्षी सांसदों ने विधेयक की प्रति फाड़ने की भी कोशिश की, हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि किस सांसद ने ऐसा किया। इस बीच लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

राजनीति में पारदर्शिता और जिम्मेदारी का संदेश

अमित शाह का कहना है कि यह बिल केवल राजनीति में नैतिकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका जोर इस बात पर है कि नेता तभी पद पर बने रहें जब वे कानून और संविधान के दायरे में पूरी तरह पारदर्शी हों। विपक्षी विरोध के बावजूद, केंद्रीय गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य राजनीति में जिम्मेदारी और शुचिता को बढ़ावा देना है, और इसे केवल विधिक प्रक्रिया के तहत लागू किया जाएगा।