तिहाड़ जेल में बंद आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में अभिजीत दीपके की भावुक पोस्ट, बोले- किसी ने त्याग करने को नहीं कहा था

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सोमवार को तिहाड़ जेल में बंद पार्टी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में एक लंबी पोस्ट लिखी। पिछले पांच दिनों से जेल में बंद दोनों नेताओं की तारीफ करते हुए दीपके ने कहा कि उनसे किसी ने भी त्याग करने के लिए नहीं कहा था, इसके बावजूद उन्होंने दूसरों की परवाह करने और उनके लिए खड़े होने का रास्ता चुना। उन्होंने दोनों के पुराने करियर, आर्थिक सुरक्षा और सुविधाजनक जिंदगी का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके पास अपनी बनाई हुई जिंदगी में आगे बढ़ते रहने की पूरी वजह थी, लेकिन उन्होंने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अलग रास्ता अपनाया।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखी पोस्ट में बताया कि आशुतोष रांका कुछ साल पहले तक लंदन में एक हाई-पेइंग कॉर्पोरेट नौकरी करते थे, जहां उन्हें लाखों रुपये मिलते थे। दूसरी ओर, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था के बारे में लिख रहे थे और एक शानदार जिंदगी जी रहे थे। दीपके के मुताबिक, दोनों के पास सफल करियर, वित्तीय सुरक्षा और अपनी मेहनत से बनाई गई जिंदगी को जारी रखने के सभी कारण मौजूद थे।

'देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में छोड़ी आरामदायक जिंदगी'

आशुतोष रांका और सौरव दास के बारे में अपनी पोस्ट में अभिजीत दीपके ने लिखा, ''लेकिन उन्होंने इस देश को एक बेहतर जगह बनाने की उम्मीद में यह सब छोड़ने का फैसला किया। उनके पास अपनी आरामदायक ज़िंदगी छोड़ने, सड़कों पर उतरने, अनिश्चितता का सामना करने और आखिर में जेल जाने का कोई कारण नहीं था। फिर भी उन्होंने ऐसा किया। इन दोनों के बारे में मुझे जो बात सबसे ज्यादा पसंद है, वह यह है कि अच्छे बैकग्राउंड से आने के बावजूद, उन्होंने उन लोगों के लिए लड़ना चुना जो उतने खुशकिस्मत नहीं हैं।''

दीपके ने अपने संदेश में दोनों नेताओं के फैसले को दूसरों के हितों के लिए उठाए गए कदम के तौर पर पेश किया। उन्होंने उनके पहले के जीवन और मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अपनी आरामदायक जिंदगी में बने रहने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने उन लोगों के लिए आवाज उठाने का रास्ता चुना जो उतने सौभाग्यशाली नहीं हैं।
'किसी ने भी दोनों से ये त्याग करने को नहीं कहा था'

अभिजीत दीपके ने पोस्ट में आगे कहा कि आशुतोष रांका और सौरव दास आसानी से दूसरों के संघर्षों से दूरी बनाए रख सकते थे। वे अपनी जिंदगी का आनंद लेते हुए उन लोगों की परेशानियों की अनदेखी कर सकते थे, जिनसे वे कभी मिले तक नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने दूसरों के लिए खड़े होने का फैसला किया।

उन्होंने लिखा, ''किसी ने उनसे ये त्याग करने के लिए नहीं कहा था। किसी ने उनसे इसकी उम्मीद नहीं की थी। लेकिन उन्होंने किया, क्योंकि वे सच में अपने अलावा दूसरों की भी परवाह करते थे। और मेरे लिए, यही सबसे बड़ी क्वालिटी है जो एक इंसान में हो सकती है। उन लोगों के लिए खड़े होना जिन्हें आप नहीं जानते, उन लड़ाइयों से लड़ना जो आपकी अपनी नहीं हैं, और अपना सब कुछ दांव पर लगाना ताकि किसी और की जिंदगी बेहतर हो सके। आशु और सौरव ऐसे ही लोग हैं।''

इस तरह दीपके ने अपने संदेश में दोनों नेताओं के प्रति समर्थन जताते हुए इस बात पर जोर दिया कि उनके मुताबिक, आशुतोष और सौरव ने उन लोगों के लिए संघर्ष करने का फैसला किया जो खुद उतने खुशकिस्मत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों की बेहतरी के लिए खड़े होना किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है।

CJP ने नेताओं की गिरफ्तारी और रिहाई में देरी पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को जानबूझकर लंबा खींच रहे हैं। पार्टी ने इस कार्रवाई को 'अवैध गिरफ्तारी' बताते हुए दावा किया कि अदालत की कार्यवाही में देरी हो रही है और जमानतदारों की गारंटी को अस्पष्ट आधार पर खारिज कर दिया गया है।

इसी बीच, मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी दिए जाने के संबंध में पुलिस ने गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है। इस मामले में धमकी देने वाले लोगों की पहचान को लेकर स्रोत में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

जंतर-मंतर में प्रवेश के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं दोनों नेता

आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था। इसी मामले को लेकर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दोनों नेताओं के समर्थन में पोस्ट लिखी है। जहां दीपके ने उनकी पुरानी जिंदगी, करियर और दूसरों के लिए संघर्ष करने के फैसले की तारीफ की, वहीं पार्टी ने गिरफ्तारी और जमानत प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।