कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और दिल्ली पुलिस के बीच शुक्रवार को उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब पुलिस की टीम उन्हें नोटिस देने उनके आवास पर पहुंची। दीपके कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा निकालने पर अड़े हैं, जबकि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने इस कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने उन्हें मार्च नहीं निकालने की चेतावनी देते हुए कहा कि इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधिकारी ने जब अभिजीत दीपके को नोटिस सौंपा, तो उन्होंने उसकी भाषा और उसमें लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए। दीपके ने नाराजगी जताते हुए पूछा, 'ये नोटिस होती है? जो मन में आए, वो लिखे जा रहे हो।' पुलिस के साथ उनकी इस बातचीत का वीडियो भी सामने आया है, जिसे दीपके ने सोशल मीडिया पर साझा किया है।
नोटिस पढ़ते हुए दिल्ली पुलिस से भिड़े अभिजीत दीपकेशुक्रवार को पुलिस की टीम उस घर पर पहुंची, जहां अभिजीत दीपके रह रहे हैं। वहां पुलिस के एक अधिकारी ने उन्हें नोटिस दिया और बताया कि कनॉट प्लेस के आसपास के इलाके में BNSS की धारा 163 लागू है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अगर कॉकरोच जनता पार्टी इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस मिलने के बाद दीपके सोफे पर बैठकर उसे पढ़ने लगे। उनके सामने रखी टेबल पर पुलिस के कई कागजात मौजूद थे। इसी दौरान उन्होंने सामने खड़े पुलिसकर्मी से सवाल किया कि आखिर उनके खिलाफ क्या आरोप लगाया गया है। नोटिस में सोशल मीडिया पर लोगों को कथित तौर पर भड़काने से संबंधित बात का भी उल्लेख था। इसमें कहा गया था कि यदि दीपके सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काते रहे, तो इसे गैरकानूनी माना जा सकता है। इस बात पर दीपके ने नाराजगी जताई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, 'ये क्या मजाक लगा रखा है आप लोगों ने। क्या नोटिस है। ये नोटिस होती है? जो मन में आए वो लिखे जा रहे हैं आप लोग।' उनके इस बयान से साफ था कि वह नोटिस में लिखी बातों से सहमत नहीं थे और पुलिस से जानना चाहते थे कि उनके खिलाफ किस आधार पर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने नोटिस पर कराए हस्ताक्षर, कंधे पर था तिरंगापुलिस अधिकारी ने अभिजीत दीपके को नोटिस देने के बाद उस पर उनके हस्ताक्षर भी करवाए। उस समय दीपके सोफे पर बैठे हुए थे और उनके कंधे पर तिरंगा दिखाई दे रहा था। दीपके ने पुलिसकर्मियों के अपने घर पहुंचने और नोटिस देने की पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। पुलिस की ओर से उन्हें यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना या तिरंगा लहराना अपने आप में कानून के खिलाफ नहीं है। हालांकि, बिना अनुमति मार्च निकालना और भीड़ जुटाना लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े फ्लैग कोड के प्रावधानों और तिरंगे का सम्मान बनाए रखने संबंधी नियमों की जानकारी भी दी गई। यानी पुलिस ने तिरंगा अभियान के उद्देश्य के बजाय मुख्य रूप से मार्च की अनुमति, भीड़ जुटाने और लागू प्रतिबंधों के पालन से जुड़े पहलुओं पर जोर दिया।
NDMC ने नहीं दी तिरंगा यात्रा की अनुमतिकनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा निकालने को लेकर विवाद की एक प्रमुख वजह अनुमति का मुद्दा है। NDMC ने कॉकरोच जनता पार्टी को इस कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद अभिजीत दीपके यात्रा निकालने पर अड़े हुए हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने उन्हें नोटिस देकर प्रतिबंधों का पालन करने और बिना अनुमति मार्च नहीं निकालने की चेतावनी दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि तिरंगा लहराने और बिना अनुमति सार्वजनिक स्थान पर मार्च निकालने के मामले अलग-अलग हैं। राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है, लेकिन किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान लागू कानूनी प्रावधानों और अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना भी आवश्यक है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?पुलिस के नोटिस से पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने उन दावों को खारिज किया था कि सार्वजनिक प्रदर्शनों से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि जनता और व्यापारियों को वास्तविक परेशानी आक्रामक प्रशासनिक कार्रवाई और अचानक लगाए जाने वाले लॉजिस्टिक प्रतिबंधों के कारण होती है। दीपके ने अपनी पोस्ट में कहा, 'बिजनेस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से नुकसान नहीं होता। उन्हें तब नुकसान होता है जब सरकार पूरे शहर को बंद करने, इंटरनेट सर्विस सस्पेंड करने और अपने ही नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाने और शहर को वॉर-जोन में बदलने का फैसला करती है।' इस बयान के जरिए उन्होंने सार्वजनिक प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने की आशंकाओं पर सवाल उठाया। उनका तर्क था कि शांतिपूर्ण विरोध की वजह से नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से शहर बंद करने, इंटरनेट सेवाएं रोकने और लोगों की आवाजाही सीमित करने जैसे कदमों से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
गांधी के रास्ते पर चलने का दावा, कई शहरों में प्रदर्शन का जिक्र
अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में कॉकरोच जनता पार्टी की विचारधारा और पिछले प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी शुरुआत से ही महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलने की बात करती रही है और वह अपने इस वादे पर कायम है।
दीपके ने दावा किया कि उनकी पार्टी मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन कर चुकी है और इन सभी प्रदर्शनों में शांतिपूर्ण तरीके अपनाए गए। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए यह बताने की कोशिश की कि उनकी पार्टी सार्वजनिक विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने में विश्वास रखती है। इस तरह कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा को लेकर एक ओर दिल्ली पुलिस ने अनुमति और प्रतिबंधों का हवाला देते हुए अभिजीत दीपके को नोटिस दिया, तो दूसरी ओर CJP प्रमुख ने नोटिस की भाषा और प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की चिंताओं पर सवाल उठाए। पुलिस ने बिना अनुमति मार्च निकालने और भीड़ जुटाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दीपके ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और अपनी पार्टी के अहिंसक रुख का बचाव किया है।