‘हमें अराजक दिखाने की कोशिश’, कारोबार प्रभावित होने के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई ने पूरे शहर को युद्ध क्षेत्र जैसा बना दिया है। उनके मुताबिक, दुकानदारों को होने वाले नुकसान के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि कारोबार पर असर पड़ने की असली वजह सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियां हैं, न कि विरोध दर्ज कराने वाले लोग। दीपके ने लिखा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से बिजनेस को नुकसान नहीं होता। उन्हें नुकसान इसलिए होता है, क्योंकि सरकार ने पूरे शहर को बंद करने का फैसला कर लिया है, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और अपने ही शहर के लोगों के आने जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही पूरे शहर को एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है।'

सरकार से सवाल पूछना अराजकता नहीं: अभिजीत दीपके

CJP प्रमुख ने कहा कि अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरना और पदों पर बैठे लोगों से जवाब मांगना लोकतंत्र की बुनियादी अभिव्यक्तियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पार्टी के प्रदर्शनों को अराजक गतिविधियों के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। दीपके के अनुसार, सरकार से सवाल पूछना या अपने अधिकारों के लिए विरोध दर्ज कराना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। उन्होंने लिखा, 'इसके बाद भी हमें अराजक दिखाने की कोशिशें की जा रहीं हैं, लेकिन सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है। अन्याय के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है और पदों पर बैठे लोगों से जवाब मांगना अराजकता नहीं है। ये लोकतंत्र की सबसे बुनियादी अभिव्यक्तियां हैं।' दीपके ने सत्ताधारी दल के पुराने राजनीतिक दौर का हवाला देते हुए कहा कि आज सत्ता में मौजूद पार्टी ने भी विपक्ष में रहते हुए दशकों तक प्रदर्शन किए, सड़कों पर उतरकर विरोध जताया और सरकार से सवाल पूछे। उनका तर्क है कि यदि उस समय प्रदर्शनकारियों पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई जातीं और पुलिस कार्रवाई होती, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग उन पदों तक नहीं पहुंच पाते, जहां वे फिलहाल हैं। उन्होंने कहा, 'आज जो पार्टी सत्ता में है, उसने प्रदर्शन करने में, सड़कों पर उतरने में और विपक्ष में रहते हुए सरकार से सवाल करने में दशकों गुजार दिए। अगर उनपर उतनी पाबंदियां लगाई जातीं, पुलिस कार्रवाई होती, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग वहां नहीं पहुंच पाते, जहां आज बैठे हैं। जब आप विपक्ष में हों तब विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताना और सत्ता में आने पर उसी को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा समझना पाखंड है।' इस बयान के जरिए CJP प्रमुख ने विपक्ष में रहते हुए विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताने और सत्ता में आने के बाद प्रदर्शनों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने के कथित अंतर पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का मामला बताते हुए सरकार की आलोचना की।
जयपुर में मारपीट का जिक्र, बोले- हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में CJP के पहले हुए विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी शुरुआत से ही महात्मा गांधी के अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलने की बात करती रही है और अपने इस सिद्धांत पर कायम है। दीपके ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में हुए प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ये सभी शांतिपूर्ण रहे। जयपुर में अपने साथ हुई कथित मारपीट का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि घटना के बावजूद उन्होंने पलटकर हमला नहीं किया। उनके मुताबिक, हिंसा का जवाब हिंसा से देना पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने शारीरिक ताकत आजमाने के बजाय संविधान में मिले अधिकारों का उपयोग करने को बेहतर बताया। दीपके ने कहा, 'जयपुर में मेरे साथ मारपीट की गई थी, लेकिन फिर भी मैंने पलटवार नहीं किया, क्योंकि हिंसा का सामना हिंसा से करना हमारे उसूलों के खिलाफ है। शारीरिक ताकत आजमाने के बजाय डॉक्टर बीआर अंबेडकर के मार्गदर्शन में तैयार संविधान के अधिकारों का उपयोग करना हमें ज्यादा बेहतर लगा। हमारी ताकत हमें संविधान के प्रति हमारी श्रद्धा से मिलती है और किसी भी तरह का उकसावा उसे हमसे दूर नहीं कर सकता।' उनके बयान में अहिंसा के साथ संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। दीपके ने कहा कि किसी भी तरह के उकसावे के बावजूद पार्टी संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगी।

कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने की तैयारी, दिल्ली पुलिस ने दी अनुमति


CJP ने शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम घोषित किया है। दिल्ली पुलिस ने एक छोटे समूह को झंडा फहराने की अनुमति दे दी है, जबकि सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। इस घटनाक्रम के बीच कार्यक्रम और शहर में लागू पाबंदियों को लेकर चर्चा जारी है। दीपके ने कहा कि पार्टी किसी तरह की विशेष सुविधा या अलग व्यवहार की मांग नहीं कर रही है। उनका कहना है कि CJP केवल उन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहती है, जो देश के संविधान के तहत हर नागरिक को मिले हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि नागरिकों के अधिकार इस बात पर निर्भर नहीं होने चाहिए कि सत्ता में कौन-सी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने कहा, 'हम कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मांग रहे हैं। हम बस उन अधिकारों का इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं जो इस गणतंत्र के हर नागरिक को मिले हुए हैं, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो।'

सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद बढ़ा विवाद

CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद की पृष्ठभूमि में पार्टी के दो नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को हाल ही में हिरासत में लिया जाना भी शामिल है। दोनों को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और नारेबाजी करने के बाद हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले पर CJP ने नाराजगी जताई है। पार्टी के नेताओं की हिरासत, प्रदर्शन स्थल से जुड़े फैसले और कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम के बीच अभिजीत दीपके ने सरकार से सवाल पूछने और विरोध दर्ज कराने के अधिकारों को लेकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने अपने बयानों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, अहिंसा और संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल को पार्टी की नीति का हिस्सा बताया है।