कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस में दुकानदारों की नाराजगी के बीच पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने का दावा कर रहे दुकानदारों के मुद्दे पर दीपके ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से व्यापार को नुकसान नहीं होता, बल्कि सरकार की ओर से शहर में लगाई गई पाबंदियों और बंद जैसी स्थिति के कारण लोगों और कारोबारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी बीच, CJP ने शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने का ऐलान किया है। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए शहर में लगाई गई पाबंदियों, इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और लोगों की आवाजाही पर रोक का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई ने पूरे शहर को युद्ध क्षेत्र जैसा बना दिया है। दीपके के मुताबिक, दुकानदारों को होने वाले नुकसान के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उन्होंने लिखा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से बिजनेस को नुकसान नहीं होता। उन्हें नुकसान इसलिए होता है, क्योंकि सरकार ने पूरे शहर को बंद करने का फैसला कर लिया है, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और अपने ही शहर के लोगों के आने जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही पूरे शहर को एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है।'
मुंबई, पुणे से जयपुर तक के प्रदर्शनों का दिया उदाहरणCJP प्रमुख ने अपने बयान में पार्टी के पहले हुए विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी शुरुआत से ही महात्मा गांधी के अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलने की बात करती रही है और अपने इस रुख पर कायम है। दीपके ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में हुए प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ये सभी विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे। उन्होंने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए जयपुर में कथित मारपीट की घटना का भी जिक्र किया। दीपके ने कहा कि उनके साथ मारपीट होने के बावजूद उन्होंने पलटकर हमला नहीं किया, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, 'जयपुर में मेरे साथ मारपीट की गई थी, लेकिन फिर भी मैंने पलटवार नहीं किया, क्योंकि हिंसा का सामना हिंसा से करना हमारे उसूलों के खिलाफ है। शारीरिक ताकत आजमाने के बजाय डॉक्टर बीआर अंबेडकर के मार्गदर्शन में तैयार संविधान के अधिकारों का उपयोग करना हमें ज्यादा बेहतर लगा। हमारी ताकत हमें संविधान के प्रति हमारी श्रद्धा से मिलती है और किसी भी तरह का उकसावा उसे हमसे दूर नहीं कर सकता।' दीपके के इस बयान में अहिंसा के साथ-साथ संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के उकसावे के बावजूद पार्टी संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगी।
सरकार पर प्रदर्शनकारियों को अराजक दिखाने का आरोपअभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि CJP के विरोध प्रदर्शनों को अराजक गतिविधि के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना, अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरना और पदों पर बैठे लोगों से जवाब मांगना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में नागरिकों के बुनियादी अधिकार हैं। उन्होंने लिखा, 'इसके बाद भी हमें अराजक दिखाने की कोशिशें की जा रहीं हैं, लेकिन सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है। अन्याय के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है और पदों पर बैठे लोगों से जवाब मांगना अराजकता नहीं है। ये लोकतंत्र की सबसे बुनियादी अभिव्यक्तियां हैं।' CJP प्रमुख ने अपने बयान में सत्ताधारी दल के पुराने राजनीतिक दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज जो पार्टी सत्ता में है, उसने विपक्ष में रहते हुए लंबे समय तक प्रदर्शन किए, सड़कों पर उतरकर विरोध जताया और सरकार से सवाल पूछे। दीपके के मुताबिक, यदि उस समय भी प्रदर्शनकारियों पर इसी तरह की पाबंदियां लगाई जातीं और पुलिस कार्रवाई होती, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग अपने मौजूदा पदों तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा, 'आज जो पार्टी सत्ता में है, उसने प्रदर्शन करने में, सड़कों पर उतरने में और विपक्ष में रहते हुए सरकार से सवाल करने में दशकों गुजार दिए। अगर उनपर उतनी पाबंदियां लगाई जातीं, पुलिस कार्रवाई होती, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग वहां नहीं पहुंच पाते, जहां आज बैठे हैं। जब आप विपक्ष में हों तब विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताना और सत्ता में आने पर उसी को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा समझना पाखंड है।' इस बयान के जरिए दीपके ने सत्ताधारी दल के विपक्ष में रहने के दौरान अपनाए गए विरोध के तरीकों और सत्ता में आने के बाद विरोध प्रदर्शनों के प्रति उसके कथित रुख की तुलना की। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का मामला बताते हुए सरकार की आलोचना की।
शाम 5 बजे तिरंगा फहराने का कार्यक्रमCJP ने शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम घोषित किया है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक छोटे समूह को झंडा फहराने की अनुमति दे दी है। हालांकि, सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसे में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और आवाजाही से जुड़ी पाबंदियां भी चर्चा में हैं। दीपके ने कहा कि पार्टी किसी तरह की विशेष सुविधा या अलग व्यवहार की मांग नहीं कर रही है। उनका कहना है कि CJP केवल उन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहती है, जो देश के संविधान के तहत हर नागरिक को मिले हुए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन अधिकारों का इस्तेमाल इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि सत्ता में कौन-सी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने कहा, 'हम कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मांग रहे हैं। हम बस उन अधिकारों का इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं जो इस गणतंत्र के हर नागरिक को मिले हुए हैं, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो।'
CJP नेताओं की हिरासत के बाद बढ़ा विवादCJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद की पृष्ठभूमि में पार्टी के दो नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को हाल ही में हिरासत में लिया जाना भी शामिल है। दोनों को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और नारेबाजी करने के बाद हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले को लेकर CJP ने नाराजगी जाहिर की है। पार्टी के विरोध प्रदर्शनों, नेताओं की हिरासत और प्रदर्शन स्थल से जुड़े फैसले के बीच अब कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने का कार्यक्रम भी सामने आया है।