बिहार के बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने बुधवार, 4 नवंबर को बक्सर जिले के केसठ में एक लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), बीजेपी और बिहार सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले किए। कृषि मंत्री विजय सिन्हा के बयान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। सांसद ने अपने संबोधन में RSS को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चले गए, लेकिन अपनी औलादों को यहीं छोड़ गए। इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा किया कि पुलिसकर्मियों को उनके यहां भेजकर उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, वृद्धा पेंशन में देरी और जीविका दीदियों को मिलने वाली सहायता राशि का मुद्दा भी उठाया।
RSS को लेकर सुधाकर सिंह की विवादित टिप्पणी
केसठ में आयोजित कार्यक्रम के मंच से सुधाकर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा। उन्होंने संगठन को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंग्रेज देश छोड़कर चले गए, लेकिन अपनी औलादों को यहीं छोड़ गए। उनका यह बयान RSS पर राजनीतिक हमला था। सांसद ने अपने संबोधन में बीजेपी और बिहार सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उनके इस बयान पर RSS या बीजेपी की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई गई सामग्री में दर्ज नहीं है।
विजय सिन्हा के बयान पर बोले- बिहार में भ्रष्टाचार और अपराधियों की सरकारबिहार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने हाल में अनंत सिंह को लेकर कहा था कि राज्य में गोली और बोली की सरकार नहीं चलेगी। सुधाकर सिंह ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विजय सिन्हा की बात सही है, लेकिन बिहार में वास्तव में भ्रष्टाचार और अपराधियों की सरकार चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। सांसद ने यह भी कहा कि विजय सिन्हा सत्ता में बैठे अपराधियों को पहचानते हैं, लेकिन उन्हें हमेशा अपना मंत्रिमंडल छिन जाने का डर बना रहता है। यह टिप्पणी उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर हमला करते हुए की।
कुंदन कृष्णन को बताया सबसे भ्रष्ट अधिकारीसुधाकर सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कुंदन कृष्णन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने उन्हें सबसे भ्रष्ट अधिकारियों में बताया और दावा किया कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके यहां करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों को भेजा गया था। सांसद ने इसे उन्हें परेशान करने की कोशिश करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका व्हाट्सएप लॉक कर दिया गया। इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता और पुलिस प्रशासन के व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि, पुलिसकर्मियों को भेजे जाने और व्हाट्सएप लॉक किए जाने के उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित अधिकारी या पुलिस विभाग का पक्ष भी इस मामले में सामने आना बाकी है। कुंदन कृष्णन और सुधाकर सिंह के बीच विवाद पहले से चल रहा है। अक्टूबर में वरिष्ठ IPS अधिकारी की ओर से सांसद को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजे जाने की खबर सामने आई थी। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि सुधाकर सिंह ने अधिकारी के खिलाफ मानहानिकारक और गलत बयान दिए हैं। इसके बाद सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।
सम्राट चौधरी की टिप्पणी पर भी साधा निशानामुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान को लेकर भी सुधाकर सिंह ने तंज कसा। सम्राट चौधरी ने कहा था कि बिहार में क्राइम हो सकता है, अपराध नहीं। इस पर RJD सांसद ने कहा कि इसमें मुख्यमंत्री का दोष नहीं है, क्योंकि उन्हें ठीक से पढ़ाया-लिखाया नहीं गया। उन्होंने इसी संदर्भ में राज्य में निरक्षर मुख्यमंत्री होने की टिप्पणी भी की। सुधाकर सिंह की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री के बयान पर सीधा राजनीतिक हमला थी। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री की भाषा तथा बयानबाजी को निशाने पर लिया।
पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का मुद्दा उठायाअपने संबोधन में सांसद ने पंचायत व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पंचायत की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कौन करेगा, इसका अधिकार संबंधित पंचायत के मुखिया के पास होना चाहिए। उनका आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था में मुखिया को केवल नाम का प्रतिनिधि बनाकर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुखिया को डमी या रबर स्टैंप की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकार मिलने चाहिए। सुधाकर सिंह के मुताबिक, पंचायत स्तर पर योजनाओं से जुड़े फैसलों और कार्यक्रमों में स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। इससे चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में प्रभावी भागीदारी मिल सकेगी।
वृद्धा पेंशन, जीविका दीदियों और निर्वाचन आयोग का भी जिक्रसांसद ने अपने भाषण में वृद्धा पेंशन मिलने में हो रही देरी और जीविका दीदियों को दी जाने वाली सहायता राशि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इन विषयों को आम लोगों और ग्रामीण परिवारों से जुड़ी समस्याओं के तौर पर सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध बयान में आयोग से जुड़ी उनकी आपत्तियों का विस्तृत विवरण या किसी खास निर्णय का उल्लेख नहीं है।
हर गांव में लाइब्रेरी बनाने की जरूरत बताईकार्यक्रम का मुख्य अवसर केसठ में लाइब्रेरी का उद्घाटन था। सुधाकर सिंह ने ग्रामीण शिक्षा में पुस्तकालयों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि गांवों में बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए और लाइब्रेरी इसमें मददगार साबित हो सकती है। उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई और वाई-फाई जैसी सुविधाओं की जरूरत पर भी जोर दिया। सांसद ने हर गांव में ऐसी लाइब्रेरी स्थापित करने की आवश्यकता बताई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पढ़ने और डिजिटल माध्यम से जानकारी हासिल करने के अवसर मिल सकें। इस तरह लाइब्रेरी के उद्घाटन कार्यक्रम में शिक्षा और ग्रामीण सुविधाओं के साथ-साथ बिहार की राजनीति, पुलिस प्रशासन, पंचायत व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली से जुड़े कई मुद्दे उठे।