बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले INDIA गठबंधन (महागठबंधन) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सीटों के बंटवारे को लेकर पहले से चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपनी घोषित सूची में कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के खिलाफ पांच उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सिर्फ एक 'फ्रेंडली फाइट' है या गठबंधन में दरार की शुरुआत?
कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ RJD के ये नामआरजेडी ने वैशाली से अजय कुशवाहा, लालगंज से शिवानी शुक्ला, और कहलगांव से रजनीश भारती को टिकट दिया है। ये तीनों सीटें कांग्रेस की मौजूदगी वाली सीटें मानी जाती हैं। इसके अलावा, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी के खिलाफ तरापुर और गौरा बौराम से भी आरजेडी ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे 'फ्रेंडली फाइट' कहा जा रहा है, लेकिन कुटुंबा सीट को लेकर बढ़ते विवाद ने माहौल और गरमा दिया है, क्योंकि यह सीट कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के पास है। आरजेडी के इस क्षेत्र में भी प्रत्याशी उतारने की चर्चा ने गठबंधन की एकता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस का आरोप: समझौते को तोड़ रहे हैं तेजस्वीकांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम ने आरजेडी और तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, वे AICC की बैठक में सहयोगी के रूप में आए थे, लेकिन अब उनकी गतिविधियां ठीक इसके उलट संकेत दे रही हैं। साथ ही उन्होंने तेजस्वी पर दलित प्रतिनिधित्व को कमजोर करने का आरोप भी लगाया है।
आरजेडी का जवाब: 'जमीनी हकीकत समझे कांग्रेस'राजेश राम के आरोपों का प्रत्यक्ष जवाब दिए बिना, आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व स्थिति पर नजर रखे हुए है, और जल्द ही गठबंधन के शीर्ष नेता मिलकर स्थिति का समाधान निकालेंगे।
तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि, आरजेडी सिर्फ बिहार और कुछ झारखंड की सीटों पर चुनाव लड़ती है। हम कांग्रेस से कर्नाटक, राजस्थान या मध्यप्रदेश में सीटों की मांग नहीं करते। इसलिए कांग्रेस को भी बिहार की जमीनी हकीकत समझनी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में इस तरह की स्थितियां आती हैं, लेकिन सभी बड़े नेता मिलकर इसे सुलझा लेंगे।
गठबंधन के लिए खतरे की घंटी या रणनीतिक दबाव?इस घटनाक्रम ने न केवल महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी रणनीति में भी संशय उत्पन्न कर दिया है। अगर यह सिर्फ दबाव की राजनीति है, तो बात जल्द सुलझ सकती है। लेकिन अगर यह मतभेद नीतिगत स्तर तक पहुंच चुका है, तो आगामी चुनाव में गठबंधन की एकजुटता पर सीधा असर पड़ेगा।
तेजस्वी यादव और आरजेडी की यह चाल महज राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार है या गठबंधन से मोहभंग की शुरुआत, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि बिहार चुनाव 2025 न केवल सत्ता की लड़ाई बनेगा, बल्कि विपक्ष के भीतर चल रहे असंतोष की भी परीक्षा होगी। INDIA गठबंधन को अगर एकजुट होकर चुनाव लड़ना है, तो आंतरिक मतभेदों को सुलझाना अब टालना मुमकिन नहीं रहा।