शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कभी निलंबित शिक्षिका को विशिष्ट प्रधानाध्यापक बनाए जाने का मामला सामने आता है, तो कभी बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के प्रखंड साधन सेवी (बीआरपी) का तबादला कर दिया जाता है। लगातार उजागर हो रही इन गड़बड़ियों ने यह साफ कर दिया है कि विभाग के भीतर सब कुछ सुचारु रूप से नहीं चल रहा है।
ताजा मामला पीएम पोषण योजना से जुड़ा है, जहां एमडीएम बीआरपी के स्थानांतरण में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अहसन द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिले में प्रखंड साधन सेवी के ट्रांसफर तय मानकों और निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत किए गए। जांच के दौरान तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ), पीएम पोषण योजना पवन कुमार द्वारा जारी स्थानांतरण आदेशों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
बिना अनुमोदन के जारी हुए आदेश, कार्रवाई की सिफारिशजांच में सामने आया कि संबंधित स्थानांतरण आदेश सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना ही निर्गत कर दिए गए। नियमों के अनुसार ऐसे किसी भी आदेश के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य होता है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने उक्त स्थानांतरण आदेश को रद्द करने और पूरे प्रकरण में दोबारा नियमानुसार कार्रवाई करने की सिफारिश जिला शिक्षा पदाधिकारी से की है।
पत्र निर्गमन को लेकर भी उठे सवालजांच के दौरान कर्मी मो. मुजाहिद निसार ने अहम जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम पोषण योजना से संबंधित पत्राचार और ई-मेल जारी करने की जिम्मेदारी सामान्य रूप से उन्हीं के स्तर से निभाई जाती है। लेकिन ज्ञापांक 1128 से जुड़ा स्थानांतरण आदेश न तो उनके द्वारा जारी किया गया और न ही उनके माध्यम से किसी कार्यालय को ई-मेल किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि निर्गत पंजी के अवलोकन में यह पत्र उनके स्तर से जारी होना दर्ज नहीं है। मुजाहिद निसार के अनुसार अन्य सभी पत्र नियमित प्रक्रिया के तहत उन्हीं के द्वारा निर्गत और मेल किए जाते हैं, ऐसे में इस विशेष आदेश का अलग तरीके से सामने आना कई तरह के संदेह पैदा करता है।
चार प्रखंडों के बीआरपी ट्रांसफर का मामलायह पूरा मामला भागलपुर जिले के पीरपैंती, सुलतानगंज, नवगछिया और नारायणपुर प्रखंडों में कार्यरत प्रखंड साधन सेवी (पीएम पोषण योजना) के स्थानांतरण से संबंधित है। इन चारों कर्मियों ने तत्कालीन डीपीओ एमडीएम द्वारा ज्ञापांक 1128, दिनांक 26 नवंबर को जारी किए गए ट्रांसफर आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
शिकायत मिलने के बाद क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अहसन ने 11 दिसंबर को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कार्यालय में संबंधित संचिका की गहन जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि स्थानांतरण आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी की स्वीकृति के बिना जारी किया गया था, जबकि नियमों में इसकी स्पष्ट व्यवस्था है। इसके विपरीत वर्ष 2022 में किए गए स्थानांतरण जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद ही किए गए थे, जिससे मौजूदा प्रक्रिया पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद आदेश जारी होने की आशंकाजांच रिपोर्ट में एक और गंभीर आशंका जताई गई है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक का कहना है कि यह संभावना भी है कि तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सेवानिवृत्त होने के बाद पूर्व तिथि में हस्ताक्षर कर स्थानांतरण आदेश जारी किया हो। इसके साथ ही पूरे मामले में जिला कार्यक्रम प्रबंधक की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है।
इन सभी तथ्यों के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग इस पूरे प्रकरण में दोषियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।