दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और धरना-प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा सीबीडी मैदान को तय किए जाने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने इस कदम पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे सरकार के डर और भय का प्रतीक बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उसके लिए उचित स्थान और अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। कुमार सौरभ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए केंद्र सरकार पर जनता की भावनाओं से कट जाने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “अहंकार में डूबी मोदी सरकार जनता के भाव और भावनाओं से पूरी तरह से कट गई है।” जन सुराज की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में बदलाव का मुद्दा चर्चा में है।
सीजेआई सूर्यकांत के बयान का भी किया जिक्रजन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने अपनी बात रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के एक बयान का उदाहरण दिया। कुमार सौरभ सिंह के मुताबिक, सीजेआई ने टिप्पणी की थी कि ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’ इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि किसी समस्या से निपटने के लिए कार्रवाई उसकी गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे आवाजाही पूरी तरह बाधित हो और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। कुमार सौरभ सिंह ने पूर्व के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट पर उदासीनता का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों के कारण देश में सीजेपी एवं अराजकता का वातावरण बना। हालांकि, उनके इस बयान में ‘सीजेपी’ का उल्लेख किस अर्थ में किया गया है, यह स्पष्ट नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उठाया मुद्दाजन सुराज के नेता ने अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए दावा किया कि यदि उनका इस्तीफा समय पर हो गया होता, तो जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की स्थिति नहीं बनती और ‘सीजेपी’ प्रासंगिक नहीं होता। कुमार सौरभ सिंह ने यह बात पूर्व की घटनाओं और मौजूदा विवाद को जोड़ते हुए कही। उनके बयान में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से संबंधित घटनाक्रम का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांगप्रदर्शन स्थलों में बदलाव के मुद्दे पर जन सुराज ने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल भी उठाया है। कुमार सौरभ सिंह ने कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार देता है और इन अधिकारों पर किसी भी तरह के कुठाराघात के मामले में सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में समर्थन और विरोध, दोनों के लिए धैर्य रखने और उचित स्थान उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने का अधिकार महत्वपूर्ण है और उसके लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
केंद्र सरकार को जन सुराज की नसीहतकेंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कुमार सौरभ सिंह ने कहा, “भारत जैसे देश जहां मजबूत लोकतंत्र है वहां केंद्र सरकार विरोध को कुचल देने का प्रयास करे ये कतई ठीक नहीं है।” इस बयान के जरिए जन सुराज ने प्रदर्शन स्थलों में बदलाव के फैसले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों को बनाए रखने की बात कही। फिलहाल, उपलब्ध सामग्री में केंद्र सरकार की ओर से जन सुराज के इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए पार्टी के बयान को उसके राजनीतिक रुख और फैसले पर दर्ज कराई गई आपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।