बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही महागठबंधन में सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर असमंजस बढ़ता जा रहा है। कई क्षेत्रों में सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
राजद, कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी के बीच सीटों के तालमेल की कोशिशें हो चुकी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समीकरण अलग नजर आ रहे हैं। कई जगह “दोस्ताना मुकाबले” की स्थिति बन गई है, जहां महागठबंधन के घटक दल सीधे आमने-सामने चुनाव लड़ रहे हैं।
इन 6 सीटों पर होगा सबसे रोचक मुकाबलावारिसलीगंज, नरकटियागंज, कहलगांव, सुल्तानगंज, वैशाली और सिकंदरा में सबसे दिलचस्प टक्कर देखने को मिलेगी। वारिसलीगंज में राजद ने अनीता देवी महतो और कांग्रेस ने सतीश कुमार को मैदान में उतारा है। नरकटियागंज में राजद के दीपक यादव का सामना कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय से होगा।
कहलगांव सीट पर राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा आमने-सामने हैं। सुल्तानगंज में चंदन सिन्हा (राजद) और ललन कुमार (कांग्रेस) की टक्कर रोमांचक रहने वाली है। वैशाली में राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के ई. संजीव सिंह का मुकाबला होगा। सिकंदरा सीट पर राजद के उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी जंग लड़ रहे हैं।
कांग्रेस और वाम दलों के बीच भी सीधी टक्करकांग्रेस और वाम दलों के बीच कई सीटों पर सीधी टक्कर की स्थिति है। बछवाड़ा, बिहारशरीफ, करगहर और राजापाकर में दोनों दल उम्मीदवार उतार चुके हैं। बछवाड़ा से कांग्रेस के गरीब दास का मुकाबला CPI के अवधेश राय से होगा। बिहारशरीफ में शिव कुमार यादव (कांग्रेस) और ओमैर खान (CPI) आमने-सामने हैं। करगहर सीट पर संतोष मिश्रा (कांग्रेस) और महेंद्र गुप्ता (CPI) की टक्कर देखने को मिलेगी। राजापाकर में कांग्रेस से प्रतिमा दास और CPI से मोहित पासवान मैदान में हैं।
राजद और वीआईपी के बीच टकरावराजद और वीआईपी पार्टी के बीच भी कुछ सीटों पर टकराव जारी है। बाबूबरही में राजद के अरुण कुशवाहा का मुकाबला वीआईपी के बिंदु गुलाब यादव से होगा। वहीं चैनपुर सीट पर राजद के ब्रज किशोर सिंह के सामने वीआईपी के बालगोविंद बिंद हैं।
राजनीतिक विश्लेषणविश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के भीतर यह “दोस्ताना मुकाबला” कई सीटों पर विपक्षी गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। जबकि भाजपा और जदयू ने उम्मीदवार चयन में कड़ा तालमेल रखा है, महागठबंधन की यह आंतरिक प्रतिस्पर्धा एनडीए के पक्ष में काम कर सकती है और कई सीटों पर फायदा पहुंचा सकती है।