बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपने पहले ही बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब राज्य में शासन का आधार “मोदी-नीतीश मॉडल” ही रहेगा। सीएम ने यह भी दोहराया कि वे आज से ही पूरी सक्रियता के साथ बिहार के विकास कार्यों में जुट जाएंगे। पटना स्थित लोकभवन में आयोजित शपथ समारोह के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार संभाला और अपनी प्राथमिकताओं का संकेत दिया।
शपथ के बाद मीडिया और समर्थकों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “बिहार में सिर्फ मोदी-नीतीश मॉडल ही लागू रहेगा और इसी दिशा में सरकार आगे बढ़ेगी।” उनके इस बयान को नई सरकार की नीति और दिशा का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। इसी दौरान लोकभवन के बाहर समर्थकों ने उत्साह में “बुलडोजर बाबा जिंदाबाद” के नारे भी लगाए, हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने बयान में फोकस पूरी तरह विकास और शासन मॉडल पर बनाए रखा।
पहली बार बिहार में बीजेपी के हाथ में मुख्यमंत्री पदबिहार की राजनीति में यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। हालांकि एनडीए गठबंधन पहले से ही सत्ता में था, लेकिन अब नेतृत्व पूरी तरह भाजपा के हाथ में आ गया है। इससे पहले विधानसभा चुनावों में जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार के पास ही रहा, लेकिन हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद सत्ता समीकरण बदल गए।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राजनीतिक नेतृत्व में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला और इसी के साथ सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले वे नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं।
नई कैबिनेट में जेडीयू की ओर से विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, जिससे गठबंधन संतुलन को बनाए रखने का प्रयास साफ नजर आता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि सम्राट चौधरी लंबे समय से नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शामिल रहे हैं और उन्हें भविष्य का संभावित नेतृत्वकर्ता माना जाता था।
समग्र रूप से यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाजपा पहली बार सीधे तौर पर राज्य का नेतृत्व कर रही है, जबकि एनडीए गठबंधन का संतुलन भी बरकरार रखा गया है।