पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन में एक अप्रत्याशित दृश्य देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर विधानसभा पहुंचे। जैसे ही वह सत्र में शामिल होने के लिए पहुंचे, उनकी हालत देखकर सदन में मौजूद नेता, पत्रकार और समर्थक हैरान रह गए। हर किसी के मन में यही सवाल उठने लगा कि आखिर तेजस्वी यादव को ऐसा क्या हुआ, जिसकी वजह से उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।
क्या है व्हीलचेयर की वजह?तेजस्वी यादव के व्हीलचेयर पर आने को लेकर रविवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई थी। पार्टी ने बताया कि तेजस्वी के पैर के नाखून में गंभीर चोट लगी है और नाखून पूरी तरह उखड़ गया है। इसी कारण उन्हें चलने में काफी परेशानी हो रही है, जिसके चलते डॉक्टरों की सलाह पर वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने खुद दी सफाईबजट सत्र के दौरान तेजस्वी यादव को बाएं पैर के अंगूठे में साफ तौर पर चोट के साथ व्हीलचेयर पर लाया गया। इस पर उन्होंने बेहद सामान्य अंदाज में कहा, “नाखून निकल गया है। कभी-कभी ऐसी चीजें हो जाती हैं।” तेजस्वी का यह बयान भले ही संक्षिप्त था, लेकिन इससे उनकी चोट की पुष्टि हो गई और अटकलों पर विराम लग गया।
सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं तेजस्वीचोट के बावजूद तेजस्वी यादव की राजनीतिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है। हाल ही में उन्होंने बिहार में सामने आए नीट छात्रा के रेप और हत्या के मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला था। तेजस्वी ने आरोप लगाया था कि इस जघन्य अपराध को उजागर करने और दोषियों को पकड़ने के बजाय बिहार सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
उन्होंने कहा था कि यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अक्षम और गैर-पेशेवर हो चुका है, जो बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच तक सही ढंग से नहीं कर पा रहा है। तेजस्वी ने दावा किया कि पुलिस से ज्यादा दोषी एनडीए सरकार का वह तंत्र है, जो अपराधियों को पकड़ने के बड़े-बड़े दावे करता रहता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
सीबीआई जांच पर भी उठाए सवालतेजस्वी यादव ने नवरुणा कांड का उदाहरण देते हुए कहा था कि कई मामलों में सीबीआई 12-13 साल तक भी आरोपियों को पकड़ने में नाकाम रही है और बाद में जांच बंद कर दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस मामले में भी वही हश्र होगा। तेजस्वी ने यह भी पूछा कि चुनावों के दौरान ‘जंगलराज’ का शोर मचाने वाले लोग अब कहां हैं और बिहार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
उन्होंने सरकार पर हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया। चोट के बावजूद बजट सत्र में उनकी मौजूदगी यह साफ संकेत देती है कि तेजस्वी यादव फिलहाल पूरी तरह राजनीतिक मोर्चे पर डटे हुए हैं और सरकार को घेरने का कोई मौका छोड़ने वाले नहीं हैं।