गुवाहाटी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पासपोर्ट और नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता, तो फिर सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज सबसे अधिक वैध माना जाएगा। गोगोई ने कहा कि इस विषय पर लगातार सामने आ रहे बयानों के कारण आम नागरिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय पासपोर्ट कोई साधारण पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे दुनिया भर के देशों और संस्थानों द्वारा स्वीकार किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी विश्वसनीयता और कानूनी मान्यता है, इसलिए इसे लेकर उठे सवालों का स्पष्ट उत्तर मिलना जरूरी है।
पासपोर्ट आखिर किस आधार पर जारी किया जाता है?गौरव गोगोई ने कहा कि यदि विदेश मंत्रालय यह मानता है कि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि फिर यह दस्तावेज किन लोगों को जारी किया जाता है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत सरकार गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराती है?
कांग्रेस सांसद के अनुसार, सामान्य तौर पर पासपोर्ट उसी व्यक्ति को दिया जाता है जो भारत का नागरिक हो। ऐसे में यदि पासपोर्ट को भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नागरिकता साबित करने का वास्तविक आधार क्या है और नागरिकों को किन दस्तावेजों पर भरोसा करना चाहिए।
नागरिकों के बीच बढ़ रहा है भ्रमगोगोई ने कहा कि नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आने से लोगों में असमंजस बढ़ रहा है। आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि आखिर कौन-सा दस्तावेज उनकी नागरिकता को प्रमाणित करता है और किसे कानूनी रूप से निर्णायक माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस संवेदनशील विषय पर स्पष्ट और पारदर्शी रुख सामने रखे, ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार की शंका न रहे।
एनआरसी का भी किया जिक्रअसम से सांसद गौरव गोगोई ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से भी जोड़ते हुए अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि असम के लोगों ने एनआरसी की पूरी प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा और अनुभव किया है। ऐसे में जब नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से नई आशंकाएं पैदा होती हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य के नागरिक यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि कहीं किसी अन्य व्यवस्था या प्रक्रिया के जरिए एनआरसी जैसी प्रणाली को फिर से लागू करने की कोशिश तो नहीं की जा रही है। इसलिए सरकार को अपनी मंशा और नीति दोनों को स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहिए।
विभिन्न दस्तावेजों को लेकर भी उठाए सवालगोगोई ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से विभिन्न पहचान और सरकारी दस्तावेजों की वैधता को लेकर लगातार बहस छेड़ी जा रही है। उनके अनुसार, पहले मतदाता पहचान पत्र, फिर पैन कार्ड और आधार कार्ड को लेकर चर्चा हुई, और अब पासपोर्ट के संबंध में भी कहा जा रहा है कि यह नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि एक-एक करके सभी प्रमुख दस्तावेजों को नागरिकता साबित करने के लिए अपर्याप्त बताया जाएगा, तो आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि आखिर कौन-सा दस्तावेज सबसे अधिक मान्य है।
सरकार से मांगा स्पष्ट जवाबकांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या भारत का पासपोर्ट चीन, श्रीलंका या किसी अन्य देश के नागरिकों को जारी किया जाता है? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर यह दावा किस आधार पर किया जा रहा है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि नागरिकता से संबंधित दस्तावेजों की कानूनी स्थिति क्या है और विभिन्न दस्तावेजों की भूमिका किस प्रकार निर्धारित की गई है।
गोगोई ने कहा कि नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार इस मामले में क्या सोच रखती है और भविष्य में नागरिकता से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर उसकी नीति क्या होगी। उनके अनुसार, स्पष्टता और पारदर्शिता ही इस विषय पर उठ रहे सवालों और आशंकाओं को दूर कर सकती है।