देश की राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी हार दी है। बीजेपी की चुनावी लहर में आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जैसे बड़े चेहरे भी हार का सामना करने पड़े। बीजेपी ने दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 48 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि आम आदमी पार्टी को सिर्फ 22 सीटों पर ही जीत मिल पाई।
योगेंद्र यादव का तर्क: AAP की हार केवल पार्टी की नहींयोगेंद्र यादव, जो कभी आम आदमी पार्टी के प्रमुख सदस्य रहे थे, ने इस हार को सिर्फ AAP के लिए नहीं बल्कि समग्र विपक्ष के लिए एक झटका बताया है। यादव ने सोशल मीडिया पर इस हार के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि यह हार उन लोगों के लिए भी है जिन्होंने भारतीय राजनीति में वैकल्पिक राजनीति का सपना देखा था। उन्होंने कहा, जब पार्टी के बड़े नेता अपनी सीटें हार जाएं, तो यह सामान्य हार नहीं होती, बल्कि एक बड़ा चेतावनी संकेत है। बीजेपी अब AAP को तोड़ने की कोशिश करेगी।
मुफ्त योजनाओं के भरोसे नहीं जीत सकते चुनाव: योगेंद्र यादवआम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के कारणों पर चर्चा करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि इस चुनावी परिणाम से यह साफ हो गया है कि सिर्फ मुफ्त योजनाओं के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते। यादव ने कहा, अगर AAP को 42-43% वोट मिले हैं, तो यह मुफ्त योजनाओं के कारण है, लेकिन जनता को सिर्फ मुफ्त सुविधाएं नहीं, बल्कि सुशासन (गवर्नेंस), बेहतर सड़कें और साफ-सुथरी दिल्ली भी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली नगर निगम (MCD) का नियंत्रण AAP के पास है, जिसके कारण दिल्ली की सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जनता की उम्मीदें और बढ़ गई थीं। जब सरकार इन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाई, तो जनता ने उसे नकार दिया।
बीजेपी को हराने के लिए 5 साल जनता के बीच रहना होगा: योगेंद्र यादवयोगेंद्र यादव ने आगे कहा कि यह हार विपक्ष के लिए एक नई शुरुआत भी हो सकती है। इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) महाराष्ट्र चुनाव के बाद से ही कमजोर पड़ चुका है, और इस हार के बाद विपक्ष को आत्ममंथन कर एक स्पष्ट रणनीति तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा, चुनाव से छह हफ्ते पहले तैयार होकर बीजेपी को हराया नहीं जा सकता। इसके लिए विपक्ष को पूरे पांच साल जनता के बीच रहकर काम करना होगा।