देश में 24 घंटे में 79,683 संक्रमित मिले और 76,205 लोग रिकवर हुए। कोरोना मरीजों का आंकड़ा 64 लाख 71 हजार 734 हो गया है। इनमें 54 लाख 24 हजार 943 लोग रिकवर हुए हैं। शुक्रवार को 1066 लोगों की जान गई। मरने वालों की संख्या 1 लाख 873 हो गई है। देश में रिकवरी रेट भी 10 दिनों में 80% से बढ़कर 83.67% हो गया है। वहीं, इस बीच शुक्रवार को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि कोरोना वायरस (Covid-19) का संक्रमण होने पर प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में कमी और कुछ दवाओं को रोके जाने के कारण डायबिटीज रोगियों (Diabetes Patients) में खतरा ज्यादा होता है। फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज में एंडोक्रायनोलॉजी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ विमल गुप्ता ने कहा कि कोरोना वायरस फेफड़े को संक्रमित करने के अलावा अग्नाशय को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, ‘देखा गया है कि इसके कारण कुछ रोगियों में अग्नाशयशोथ हो जाता है। अग्नाशय इंसुलिन स्रवित करता है, जो ग्लूकोज के स्तर को नियमित करने में सहायक होता है लेकिन वायरस स्रवण में कमी लाता है जिससे रोगियों में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। कई रोगी संक्रमित होने के बाद पहली बार डायबिटीज का शिकार होते हैं।’ दिल्ली सरकार द्वारा हाईकोर्ट में सौंपे गए सेरोलॉजिकल निगरानी रिपोर्ट के मुताबिक यह बताया गया कि डायबिटीज रोगियों में संक्रमण के कारण खतरा ज्यादा होता है।
ऐसे होता है असरगुप्ता ने कहा कि भारत में अधिकतर डायबिटीज रोगियों में मोटापा एवं अन्य बीमारियां होती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को कोरोना वायरस हुआ है तो उसे एसजीएलटी2 निरोधी एवं अन्य दवाएं नहीं दी जाती हैं जो वजन को कम करती हैं और शर्करा के स्तर को नियमित करती हैं। जब हम ये दवाएं बंद करते हैं तो मधुमेह का स्तर बढ़ जाता है।'
सोडियम ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्टर-2 (एसजीएलटी2) दवा का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज में किया जाता है। राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के निदेशक डॉ बी.एल. शेरवाल ने कहा कि कोविड-19 जैसी बीमारियों में तनाव के कारण शर्करा का स्तर बढ़ने की संभावना होती है।
उन्होंने कहा, जिन रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वायरस के कारण उनको खतरा ज्यादा होता है। इस तरह के रोगियों में मृत्यु दर अधिक होगी क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और अधिक देखभाल करने की जरूरत होती है।
डॉ देशवाल ने कहा, 'इस तरह के रोगियों के इलाज में अतिरिक्त प्रयास करना होता है। अगर हम मरने वाले रोगियों के आंकड़े देखें तो उनमें से अधिकतर में अनियंत्रित डायबिटीज की शिकायत थी।'
मौतों का आंकड़ा 1 लाख के पारबता दे, कोरोना के चलते 2 अक्टूबर को भारत में मौतों का आंकड़ा 1 लाख को पार कर गया। अमेरिका और ब्राजील के बाद अब भारत कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है। भारत में मौतों का आंकड़ा एक लाख पार हो चुका है और भारत में कुल केसों की संख्या 64 लाख से ज्यादा है। वहीं वर्तमान में देश में कोरोना से होने वाली मौतों का औसत डेथ रेट 2 प्रतिशत है। भारत में कोरोना से पहली मौत 12 मार्च को हुई। इसके 48 दिनों बाद इन मौतों का आंकड़ा 1000 पहुंच गया।
वहीं अगले 78 दिनों में मौतों की यह संख्या 10 गुना बढ़कर 10 हजार पहुंच गई। फिर अगले 31 दिनों में मौतों का आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच गया। अगले 48 दिनों में यह आंकड़ा 1 लाख मौतों तक पहुंच चुका है।