दुपहिया और चौपहिया गाड़ी चलाने का लाइसेंस बनवाने के लिए ऑटोमेटेड ट्रायल से गुजरना होगा। यानी कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। पुराने ट्रायल या दलालों के माध्यम से आसानी से लाइसेंस नहीं बनेंगे। जिला मुख्यालय के जिला परिवहन विभाग कार्यालय में लाइसेंस के लिए ट्रायल ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर कैमरों की निगरानी में होगी।
डीटीओ कार्यालय परिसर में बाकायदा 80 लाख से ऑटोमेटेड ट्रैक का निर्माण हो रहा है। इस ट्रैक पर गणित के 8 और अंग्रेजी के एच पर गाड़ी चला कर दिखाना होगा। यहां लगे कैमरा, सेंसर और सॉफ्टवेयर के मुताबिक ट्रायल में यदि वाहन सही तरीके से चलाया तो ही लाइसेंस मिलेगा।
दरअसल, फरवरी से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब लोगों को ड्राइविंग ऑटोमेटेड ट्रैक पर ट्रायल देने के बाद लाइसेंस मानवीय निर्णय से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के आधार पर दिया जाएगा। डीटीओ कार्यालय में दुपहिया और कार के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के ट्रायल ऑटोमेटेड ट्रैक पर ली जाएगी। यहां ट्रायल लेने का कार्य अब परिवहन निरीक्षक नहीं, बल्कि ऑटोमेटेड होगा।कैमरे व सेंसर ड्राइविंग ट्रायल दे रहे लाइसेंस आवेदक के वाहन चलाने के तरीके का विश्लेषण करेंगे और सॉफ्टवेयर उसी अनुरूप परिणाम जारी करेगा। कैमरा और सॉफ्टवेयर के मुताबिक यदि वाहन सही तरीके से चलाया तो लाइसेंस आवेदक को पास करार दिया जाएगा और यदि गलती हुई तो उसे फेल कर दिया जाएगा। ऑटोमेटेड ट्रैक पर चार तरह की ट्रायल ली जाती है। एंगुलर पार्किंग, गणित के 8 के ट्रैक पर कार चलाने, अंग्रेजी के एच पर कार चलाने और रपट पर कार को रोककर दिखाने का टेस्ट देना होगा।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में ऑटोमेटेड ट्रैक पर कैमरों के जरिए ट्रायल लेने से प्रक्रिया पारदर्शी होगी। नई प्रक्रिया में परिवहन विभाग के निरीक्षकों का दखल नहीं रहेगा। लाइसेंस जारी करने का कार्य सॉफ्टवेयर पर निर्भर होगा।