कारखानों में अक्सर बच्चों से मजदूरी करवाई जाती हैं जो कि गैरकानूनी हैं और ऐसे ही 31 बालश्रमिक को चूड़ी बनाने के 6 कारखानों से मुक्त कराया गया हैं। इन बच्चों को UP-बिहार से अच्छी शिक्षा के लालच में लाया गया था। गुरुवार रात को बालश्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। इसमें जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के नार्थ जिले के तीन थाना इलाकों में आधा दर्जन जगहों पर छापामारी कर चूड़ी बनाने के कारखाने में बालश्रम कर रहे 31 बच्चों को छुड़वाया गया। वहीं, पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। इन मासूम बच्चों को उत्तरप्रदेश और बिहार के मासूम बच्चों को अच्छी शिक्षा और कैरियर बनाने के बहाने जयपुर लाकर चूड़ी बनाने के कारखानों में बालश्रम करवाया जाता था। यहां बच्चों से रात दिन काम करवाया जाता है। इन्हें बाहर नहीं घूमने दिया जाता है। कारखानों में रखा जाता है। इससे पहले भी जयपुर में कई कार्रवाई की जा चुकी है।
श्रम विभाग के सचिव नीरज के पवन और DCP नार्थ डॉ। राजीव पचार के निर्देशों के बाद गुरुवार देर शाम को कमिश्नरेट पुलिस, श्रम विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, बचपन बचाओ आंदोलन की अलग अलग टीमें गठित की गई। जिन्होंने कोतवाली, शास्त्री नगर और भट्टा बस्ती इलाकों में मकानों में चल रहे कारखानों में छापा मारा। यह कार्रवाई रात करीब 9 बजे तक चली।इन इलाकों में छह जगहों पर मारा छापा, पांच गिरफ्तार, 31 बच्चे मुक्त
DCP डॉ. राजीव पचार के मुताबिक कोतवाली इलाके में चांदपोल स्थित नींदड़ राव के रास्ते में दो मकानों में 3 जगहों पर छापा मारा गया। यहां से 10 बच्चों को मुक्त करवाया। इन सभी की उम्र 14 साल से कम थी। यहां कोतवाली थानाप्रभारी यशवंत सिंह और मानव तस्करी रोधक टीम के कांस्टेबल दिलसुख के नेतृत्व में टीम ने कारखाना संचालक मोहम्मद परवेज, मोहम्मद नौशाद और मोहम्मद उमर को गिरफ्तार किया गया। ये तीनों आरोपी बिहार में समस्तीपुर जिले के रहने वाले है।
अच्छी शिक्षा और कैरियर बनाने का झांसा देकर यहां लाते है
शास्त्री नगर इलाके में 2 जगहों पर छापामारी कर चूड़ी बनाने के कारखानों से 14 बालश्रमिकों और भट्टा बस्ती इलाके में एक मकान पर दबिश देकर कारखाने में चूड़ी बना रहे 7 बच्चों को छुड़वाया। यहां से भी दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।