#MeToo नौ महिला पत्रकारों ने लगाए है विदेश राज्य मंत्री पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप, बड़ा सवाल क्या अब भी पद पर बने रहेंगे एमजे अकबर?

नौ महिला पत्रकारों के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर अब रविवार को देश लौटेंगे। केंद्र सरकार ने उनके इस्तीफ़े के दबाव की ख़बर को शीर्ष सूत्रों ने ख़ारिज कर दिया है। केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा है कि विदेश दौरे से लौटने पर उनका पक्ष सुना जाएगा। उन्हें ख़ुद इस पर फ़ैसला लेना चाहिए। बता दे, #MeToo कैंपने के तहत पत्रकार रह चुके केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर MJ Akbar भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। जिसे लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है और कांग्रेस एमजे अकबर के इस्तीफे की मांग कर रही है। अब सवाल ये है कि क्या यौन उत्पीड़न के इतने सारे आरोपों के बावजूद एमजे अकबर विदेश राज्य मंत्री बने रहेंगे? अब तक करीब नौ महिलाओं ने उनके खिलाफ लिखा है।

इस मामले में सरकार में महिलाओ के अंदर असंतोष की बात सामने आ रही है। साथ ही साफ़ है कि केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इस मुद्दे पर संबंधित व्यक्ति का ख़ुद बोलना ही बेहतर होगा, क्योंकि मैं उस समय वहां मौजूद नहीं थी तो इसपर कुछ नहीं कह सकती। उन्हें खुद बयान जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं मीडिया कि सराहना करती हूं कि वे अपनी महिला सहकर्मियों के साथ खड़ा है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए अपनी बात रखना काफी मुश्किल होता है। अपनी बात कहने वालों का मज़ाक न उड़ाएं। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के कई तरीके मौजूद हैं। स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाएं काम पर इसलिए नहीं जाती कि वहां उनका उत्पीड़न हो, बल्कि वे अपने सपनों को जीने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए काम पर जाती हैं। मुझे उम्मीद है कि जिन महिलाओं ने आवाज उठाई है उन्हें न्याय मिलेगा और यह उनका हक है। आपको बता दें कि स्मृति ईरानी से पहले उमा भारती और मेनका गांधी भी मी टू के समर्थन में बोल चुकी हैं।

सुषमा स्वराज ने नहीं दिया कोई जवाब

इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मंगलवार को पूछा गया था कि क्या उनकी सरकार केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी, लेकिन उन्होंने सवाल को टाल दिया था। देश में ‘मी टू’ अभियान तेज हो गया है, मनोरंजन और मीडिया जगत से जुड़ी कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न की आपबीती साझा की है।

स्मृति ईरानी से पहले उमा भारती और मेनका गांधी भी मी टू के समर्थन में बोल चुकी हैं। यानी पुरुष मंत्री जो कहें, ज़्यादातर महिला मंत्रियों के बीच ये मुद्दा बना हुआ है। एमजे अकबर अपने अफ्रीकी दौरे पर हैं और उन्होंने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है। न उनके मंत्रालय ने कुछ कहा है, लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि अगर महिलाएं उन्हें लिखें तो वो सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेंगी।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि आप जिस शख़्स का नाम ले रही हैं अगर महिलाओं ने शिकायत की तो हम ऐसा करेंगे। अहम बात ये है कि आरएसएस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले दत्तात्रेय होसबोले ने मीटू के पक्ष में ट्वीट करने में कोई हिचक नहीं दिखाई। सवाल है, क्या इन सबके बावजूद वे केंद्र सरकार में बने रह पाएंगे? वहीं यूपी सरकार की मंत्री रीता रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि सवाल इस्‍तीफे का नहीं है। सवाल ये है कि आरोप लगे तो सीधे हों, तो आरोप लगाने का हक महिलाओं का है पर जांच भी होनी चाहिए। मीटू कैंपेन में निश्चित रूप से हर व्‍यक्ति अपना-अपना पक्ष रख रहा है। महिला ने अपना पक्ष रखा है और पुरुष को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है तो देखते हैं कि कैसे होता है।

महिला पत्रकारों ने लगाया है यौन उत्पीड़न के आरोप

करीब 9 महिला पत्रकारों ने विस्तार से लिखा है कि किस तरह केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने संपादक रहते हुए अपने पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए उनके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। कुछ पत्रकारों ने बताया कि अकबर ने अपने केबिन में बुला कर कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसी तरह उनके होटलों में बुला कर पत्रकारों का नौकरी के लिए इंटरव्यू करना और उनसे अश्लील बातें करने के आरोप भी लगाए गए हैं।