अयोध्या मामला : जानिए किसे मिली विवादित जमीन, मंदिर निर्माण के लिए करना होगा अभी और इंतजार

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अयोध्या जमीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 40 दिनों की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर रामलला का दावा मान्य है। इस जमीन पर मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। केंद्र सरकार ही ट्रस्ट के सदस्यों का नाम निर्धारित करेगी। इसके साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का आदेश दिया गया है। वैकल्पिक जमीन को केंद्र और योगी सरकार अयोध्या में देगी। राम जन्मभूमि न्यास को भी जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया गया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन का बाहरी और आंतरिक हिस्से पर रामलला का हक है। इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट में सदस्यों को चुने जाने का अधिकार दिया है। तीन महीने में ट्रस्ट बनने के बाद विवादित जमीन और अधिग्रहित भूमि के बाकी हिस्से को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले जस्टिस कलिफुल्ला, श्रीराम पांचू और श्रीश्री रविशंकर की प्रशंसा की। साथ ही निर्मोही अखाड़े को मंदिर के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में जगह दी जाए, हालांकि यह केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा। अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपना दावा रखने में विफल हुआ है। मुस्लिम पक्ष ऐसे सबूत पेश करने में विफल रहा है कि जिससे यह साबित हो सके कि विवादित जमीन पर सिर्फ उसका ही अधिकार है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अलग जमीन दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि मुस्लिमों को नई मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाए।
न बराबरी मिली और न ही न्याय- जिलानी

फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमें न बराबरी मिली और न ही न्याय। फैसले पर असहमति जताना हमारा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट भी कभी-कभी गलत हो सकता है। कोर्ट ने पहले भी अपने फैसलों पर पुनर्विचार किया है, अगर हमारी वर्किंग कमिटी फैसला लेती है तो हम भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमें स्वीकार


वहीं, मुस्मिल पक्ष के पैरोकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ कहा, ठीक कहा। हम पहले से ही कहते रहे हैं कि कोर्ट जो भी फैसला करेगी उसे स्वीकार करेंगे। अब सरकार को फैसला करना है कि वह हमें जमीन कहां पर देती है।निर्णय को हार-जीत के तौर पर न देखें : मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भावत ने अयोध्या पर आए फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्याय देने वाले निर्णय का स्वागत है। भाईचारा बनाए रखने के प्रयासों का स्वागत है। सरकार विवाद खत्म करने की पहल करे। मंदिर निर्माण में साथ मिलकर काम करेंगे। झगड़ा विवाद अब समाप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। यह मामला दशकों से चल रहा था और यह सही निष्कर्ष पर पहुंच गया है। इसे हार या जीत के तौर पर नहीं देखना चाहिए। हम समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी के प्रयासों का भी स्वागत करते हैं।'

राम का वनवास खत्म, अब बनेगा मंदिर : रामदेव

बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि, अब राम का वनवास खत्म हुआ। अब अयोध्या में बनेगा राम मंदिर। इस वक्त हमें अराजक तत्वों से सावधान रहने की जरूरत।

देश में शांति, सौहार्द व भाईचारा बना रहे यही सबसे ज्यादा जरूरी : हाजी महबूब

अयोध्या भूमि विवाद में बाबरी मामले के पक्षकार रहे हाजी महबूब ने मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट का फैसला स्वीकार करते हैं। देश में शांति, सौहार्द व भाईचारा बना रहे यही सबसे ज्यादा जरूरी है।