नई टैरिफ धमकियों के बीच मशहूर राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार फरीद जकारिया ने भारत के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप सुझाया है। उनका कहना है कि भारत को जल्दबाजी या अतिव्यक्त प्रतिक्रिया से बचते हुए धैर्य रखना चाहिए और लंबी अवधि की आर्थिक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि समय भारत के पक्ष में है।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) में दावोस के दौरान इंडिया टुडे से बातचीत में जकारिया ने स्पष्ट किया कि ट्रंप की अस्थिर नीतियों को लेकर भारत को घबराने की जरूरत नहीं है।
ट्रंप के साथ भारत की रणनीतिजकारिया ने कहा, धैर्य ही सफलता की कुंजी है। ट्रंप अस्थिर हैं और उनका मिजाज अलग है। उनका सुझाव था कि भारत को अनावश्यक टकराव से बचना चाहिए और परिस्थितियों को संभालते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
वे व्यंग्यात्मक अंदाज में बोले, अगर उन्हें भव्य राजकीय भोज पसंद हैं, तो राष्ट्रपति भवन में एक शानदार स्टेट डिनर आयोजित कीजिए। आखिरकार यह बकिंघम पैलेस से चार गुना बड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिखावा और प्रतीकात्मकता ट्रंप जैसे नेताओं के साथ संवाद करते समय असर दिखाती है।
अंबानी से भी सलाह ली जा सकती हैजकारिया ने आगे कहा, अगर कल्पनाशीलता की कमी है, तो अंबानी से पूछिए कि दुनिया को प्रभावित करने वाली पार्टी कैसे दी जाती है। ट्रंप को राजा जैसा व्यवहार पसंद है, तो वैसा ही पेश किया जाए।
उनका यह भी मानना है कि शक्ति का संतुलन समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, बिना वास्तविक ताकत के ट्रंप को धमकी देने की कोशिश मत कीजिए। वे तुरंत समझ जाते हैं कि कब दबाव बनाना है और कब नहीं।
चीन जैसी पकड़ नहीं, समझदारी से खेलेंजकारिया ने स्पष्ट किया कि फिलहाल भारत के पास अमेरिका पर चीन जैसी लेवरेज नहीं है। उनका कहना था, जब आपके पास पत्ते हों, तभी खेलिए। ब्लफ़ करना काम नहीं आएगा।
मनमोहन सिंह और मोदी सरकार की तुलना करते हुए जकारिया ने कहा, दोनों के समय में आर्थिक आंकड़े लगभग समान रहे हैं। प्रति व्यक्ति GDP वृद्धि लगभग बराबर रही है। मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया है।
खपत आधारित अर्थव्यवस्था भारत की बड़ी ताकतजकारिया ने कहा, भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत इसकी खपत आधारित अर्थव्यवस्था है। अमेरिका और इंडोनेशिया के साथ भारत ही वो देश हैं, जहां GDP में खपत का हिस्सा 60 प्रतिशत से ज्यादा है। चीन में यह केवल 30–35 प्रतिशत है।
उन्होंने निर्यात की अहमियत भी रेखांकित की। जकारिया ने बताया कि निर्यात न केवल उच्च गुणवत्ता वाली वृद्धि लाता है, बल्कि अच्छे वेतन वाली नौकरियां और तकनीकी विकास में भी मदद करता है।
iPhone और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में भारतजकारिया ने कहा, भारत में iPhone की आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शून्य से लेकर अब लगभग 45 प्रतिशत स्मार्टफोन अमेरिका के लिए भारत से सप्लाई हो रहे हैं। उन्होंने भारत को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर और जोर देने की सलाह दी।
ट्रेड डील को जीवन-मरण का सवाल न बनाएंभारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जकारिया ने कहा, अगर अच्छा समझौता हो गया तो बढ़िया, लेकिन इसे जीवन-मरण का सवाल मत बनाइए। भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका पर इतनी निर्भर नहीं है कि कोई खतरा हो। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तकनीक और उद्योग की वैल्यू चेन में ऊपर उठने में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।