कीमती धातुओं के बाजार में इस सप्ताह जबरदस्त हलचल देखने को मिली। वायदा कारोबार में सोना और चांदी दोनों ने मजबूती दिखाई, लेकिन चांदी ने तो रफ्तार के मामले में बाजी मार ली। सिर्फ एक सत्र में चांदी करीब 8,500 रुपये उछल गई, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों के कारण बुलियन सेगमेंट में नई ऊर्जा लौटती दिख रही है।
अमेरिका से आए अपेक्षाकृत कमजोर महंगाई आंकड़ों ने यह उम्मीद जगा दी है कि इस साल फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। दरों में संभावित नरमी की संभावना ने कीमती धातुओं को सहारा दिया है, क्योंकि कम ब्याज दरें सोने-चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट्स को आकर्षक बनाती हैं।
5 मार्च, शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में 3.62% यानी 8,564 रुपये की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही भाव 2,44,999 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। वहीं अप्रैल डिलीवरी वाला सोना भी हल्की मजबूती के साथ 305 रुपये चढ़कर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। भले ही सोने की तेजी सीमित रही, लेकिन समग्र रुख सकारात्मक नजर आया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला सपोर्ट
घरेलू बाजार की तरह वैश्विक स्तर पर भी कीमतों में रिकवरी देखी गई। पिछले सत्र में भारी बिकवाली के बाद हाजिर चांदी 2.1% उछलकर 77.27 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक दिन पहले ही इसमें करीब 11% की गिरावट दर्ज हुई थी। इसी तरह हाजिर सोना 2.33% बढ़कर 5,063 डॉलर प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सप्ताह के आधार पर देखें तो सोना लगभग 1% से अधिक की बढ़त बनाए हुए है।
यह सुधार उस तेज गिरावट के बाद आया है जब गुरुवार को बुलियन में लगभग 3% की कमजोरी आई थी और कीमतें करीब एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसे में मौजूदा तेजी को तकनीकी रिकवरी और नई खरीदारी दोनों का मिश्रण माना जा रहा है।
सोने का संभावित दायरा क्या कहता है?तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर सोने के लिए मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में उभरा है। इस स्तर पर भौतिक खरीदारी और निवेश मांग दोनों सक्रिय हो रही हैं। यदि कीमतें लगातार 1,60,000 रुपये के ऊपर टिकती हैं, तो 1,65,000 से 1,70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की नई तेजी का रास्ता खुल सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड अपने प्रमुख स्ट्रक्चरल सपोर्ट को निर्णायक रूप से नहीं तोड़ता, तब तक बड़ी गिरावट की आशंका सीमित रहेगी। यानी मौजूदा माहौल में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है, बशर्ते जोखिम प्रबंधन का ध्यान रखा जाए।
चांदी में दिख रहा मजबूत आधारचांदी की बात करें तो MCX पर 2,33,000 से 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम का दायरा एक ठोस सपोर्ट जोन बन चुका है। पिछले सप्ताह की तुलना में गिरावट का दबाव कम हुआ है और कीमतों में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। यह दर्शाता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी उभर रही है।
यदि चांदी 2,65,000 रुपये के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देती है, तो मध्यम अवधि में 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक की तेजी संभव है। वैश्विक आपूर्ति में सख्ती और औद्योगिक मांग में स्थिरता भी चांदी को आधार प्रदान कर रही है।
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक ब्याज दर संकेतों पर रहेगी। फिलहाल रुझान यह संकेत दे रहा है कि सोना-चांदी दोनों में अस्थिरता के बीच ऊपर की ओर झुकाव बना रह सकता है।