भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 23 जनवरी को भारी दबाव में रहा और प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में निफ्टी 25,100 के स्तर से नीचे चला गया। सेंसेक्स 769.67 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 241.25 अंक या 0.95 प्रतिशत टूटकर 25,048.65 पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स के 30 में से अधिकांश शेयर लाल निशान पर बंद हुए। आज सबसे ज्यादा बिकवाली अदानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक और पावर ग्रिड के शेयरों में देखने को मिली।
निफ्टी के प्रमुख नुकसान वाले शेयरआज निफ्टी में बिकवाली का दबाव काफी रहा। सबसे अधिक नुकसान वाले शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन और सिप्ला शामिल रहे। वहीं, कुछ शेयर जैसे डॉ. रेड्डीज लैब्स, टेक महिंद्रा, ओएनजीसी, हिंडाल्को और एचयूएल ने बढ़त के साथ बंद होने में सफलता पाई। सेक्टोरल इंडेक्स में भी सभी क्षेत्रों के सूचकांक लाल निशान में रहे। कैपिटल गुड्स, पावर, रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.5 प्रतिशत टूटा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
भू-राजनीतिक अनिश्चितताएंहालांकि अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर कुछ हलचल के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन नाटो के साथ कथित समझौते को लेकर स्थिति अभी भी अस्पष्ट है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि नाटो के साथ समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड तक स्थायी और पूर्ण पहुंच मिल गई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि न होने के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है।
भारतीय रुपया कमजोर हुआइंट्रा-डे कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया। रुपये की कमजोरी ने बाजार में डर और चिंता बढ़ा दी। पिछले साल रुपये में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी और इस साल अब तक यह 2 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं।
एफआईआई की भारी बिकवालीविदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में एफआईआई कैश सेगमेंट में 36,500 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच चुके हैं। इस आक्रामक बिक्री ने निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर किया और बाजार में गिरावट का माहौल पैदा किया।
बजट 2026 से पहले सतर्कताकेंद्रीय बजट 2026 के पहले निवेशक सतर्क हैं। उन्हें बजट से विकास और निवेशकों के हित में कदम उठाए जाने की उम्मीद है, लेकिन अप्रत्याशित निर्णयों को लेकर वे संभलकर कदम रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर में पूंजीगत निवेश बढ़ाकर, रोजगार सृजन को गति देकर और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में बदलाव जैसे उपाय करके आर्थिक विकास को मजबूत करेगी और निवेश माहौल को बेहतर बनाएगी।