सप्ताह के दूसरे कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया। आईटी, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई तेज गिरावट ने बाजार की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया। कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी और रुपये पर बने दबाव ने निवेशकों की भावनाओं को झकझोर कर रख दिया। नतीजतन, बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी साढ़े तीन सौ अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ।
बाजार में मचा कोलाहलबीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,065.71 अंक यानी लगभग 1.28 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 82,180.47 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने और निचले स्तरों को भी छुआ। वहीं, एनएसई का मानक सूचकांक निफ्टी भी दबाव से उबर नहीं पाया और 350 अंकों से अधिक फिसलकर सत्र का अंत किया।
बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे आईटी शेयरों में कमजोरी, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में तगड़ी बिकवाली के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी के बाहर जाने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की रायमार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशक बेहद संभलकर कदम रख रहे हैं और किसी स्पष्ट संकेत का इंतजार कर रहे हैं। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द आने वाला है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इस निर्णय का प्रभाव उभरते बाजारों पर, खासकर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और रुपये में जारी कमजोरी ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। इसका असर सबसे ज्यादा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखने को मिल रहा है, जहां दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा परिदृश्य में लगभग सभी सेक्टरों के प्रति नकारात्मक रुझान बना हुआ है और निवेशक जोखिम लेने से दूरी बनाए हुए हैं।