शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में संतों की राय बंटी, कौन किस पक्ष में? निश्चलानंद सरस्वती ने दी कड़ी चेतावनी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर सियासत और संत समाज की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वे पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में नमन करते हैं और उनसे विनम्र आग्रह करते हैं कि वे संगम में स्नान करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया है, उनकी जांच की जाएगी। मौर्य ने आगे कहा कि वह शंकराचार्य जी से अनुरोध करते हैं कि वे अपना विरोध समाप्त करें और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए संगम स्नान करें।

निश्चलानंद सरस्वती का तीखा बयान

इस पूरे विवाद पर पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियां एक भयंकर टकराव को न्योता देने जैसी हैं। उनका कहना था कि जब तक समाज के भीतर आक्रोश नहीं उफन रहा, तब तक ऐसे मुद्दों को हल्के में लिया जा रहा है, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी और खतरनाक हो सकते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री ने दी संयम की सलाह

कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने इस विवाद को लेकर संतुलित रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, ताकि सनातन धर्म की छवि को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे सनातन पर मजाक उड़ाया जाए। समझदारी इसी में है कि बीच का रास्ता निकाला जाए और विवाद को यहीं समाप्त किया जाए।

कंप्यूटर बाबा का बड़ा एलान

बसंत पंचमी के अवसर पर कंप्यूटर बाबा ने पंच अग्नि तपस्या कर इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। वैष्णव परंपरा में इसे सबसे कठिन तप माना जाता है, जिसमें साधक चारों ओर अग्नि के बीच बैठता है और सिर पर भी जलता हुआ कलश रखा जाता है। कंप्यूटर बाबा ने कहा कि यह तप शंकराचार्य के सम्मान में किया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 10 और 11 मार्च को दिल्ली में एक निर्णायक संत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में चारों शंकराचार्य, समस्त जगतगुरु, अखाड़ा प्रमुख, महामंडलेश्वर, महंत और देशभर के संत-महात्माओं को समान सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाएगा।

सम्मेलन के लक्ष्य क्या होंगे?

कंप्यूटर बाबा के अनुसार इस संत सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक ठोस आध्यात्मिक संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि जब तक गौ माता सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक राष्ट्र की आत्मा भी सुरक्षित नहीं रह सकती।

बाबा रामदेव की प्रतिक्रिया


योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इस विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी को भगवान शंकर का साक्षात स्वरूप माना जाता है, ऐसे में उनसे किसी भी तरह के विवाद की अपेक्षा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि साधु का स्वभाव विवाद करना नहीं होता, विशेषकर किसी धर्मस्थल या तीर्थ स्थान पर।

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि न स्नान को लेकर विवाद होना चाहिए और न ही किसी प्रकार की पालकी या परंपरा को लेकर। उनके अनुसार साधु वही होता है जिसने अपने भीतर के अहंकार को समाप्त कर दिया हो।

बाहरी चुनौतियों के बीच आंतरिक एकता जरूरी

रामदेव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब देश के बाहर सनातन विरोधी ताकतें सक्रिय हैं—कोई इस्लामीकरण की बात कर रहा है, कोई ईसाईकरण की, तो ऐसे में सनातन समाज को आपस में लड़ने के बजाय एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शत्रु बाहर भी कम नहीं हैं, इसलिए आंतरिक टकराव से बचना ही सबसे बड़ा धर्म है।