भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109 अंकों की छलांग लगाकर 73 हजार के पार बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी के पीछे कई कारण रहे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर की गई टिप्पणी के साथ भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में उछाल, रुपये की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने निवेशकों का ध्यान खींचा।
सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार बढ़त के साथ किया कारोबारकारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,109 अंकों की तेजी के साथ 73,033.78 अंक पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स ने 73,045.67 अंक का उच्चतम स्तर भी छुआ। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,721.95 अंक पर बंद हुआ, जो उसका दिन का उच्चतम स्तर रहा। बाजार में तेजी के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की LTCG और STT को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही। उन्होंने एक कार्यक्रम में इन करों से जुड़े मुद्दों पर निवेशकों और अन्य संबंधित पक्षों की राय जानने की बात कही। हालांकि, उनके बयान में LTCG को तत्काल समाप्त करने का कोई फैसला घोषित नहीं किया गया।
LTCG और STT पर क्या बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण?ब्लूमबर्ग के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को लेकर चल रही चर्चा पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार LTCG को हटाने के मुद्दे पर संबंधित पक्षों की राय जानना चाहती है। उनके मुताबिक, भारत के साथ-साथ विदेशों में मौजूद निवेशक भी इस विषय पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। वित्त मंत्री ने STT और अलग-अलग एसेट क्लास के साथ समान व्यवहार किए जाने को लेकर चल रही बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन मुद्दों पर हो रही चर्चाओं को सकारात्मक बताया। उनके बयान से LTCG और STT की मौजूदा व्यवस्था को लेकर जारी बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए इन दोनों करों का मुद्दा अहम है, क्योंकि इनका संबंध निवेश और उससे होने वाले लाभ से है। हालांकि, वित्त मंत्री की टिप्पणी को टैक्स में बदलाव की आधिकारिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर संबंधित पक्षों के विचार जानने की बात कही है।
इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर कितना लगता है LTCG टैक्स?मौजूदा नियमों के मुताबिक, इक्विटी और म्यूचुअल फंड से जुड़े निवेश पर निर्धारित अवधि से अधिक समय तक निवेश बनाए रखने के बाद होने वाले लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। दिए गए विवरण के अनुसार, 12 महीने से अधिक की अवधि वाले निवेश पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लगता है। इसमें 1.25 लाख रुपये तक के लाभ को छूट के दायरे में रखा गया है। LTCG और STT को लेकर निवेशकों के सवालों के बीच वित्त मंत्री का बयान इसलिए महत्वपूर्ण रहा कि सरकार ने इस विषय पर संबंधित पक्षों की राय जानने की बात कही है। हालांकि, कर की दरों या मौजूदा नियमों में किसी तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई।
भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी से बाजार को मिला सहारामंगलवार को घरेलू आईटी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। एचसीएल समेत आईटी क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में उछाल दर्ज किया गया। इस तेजी की एक वजह वैश्विक बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट को माना गया है। इसके बीच निवेशकों का रुझान भारतीय आईटी कंपनियों की ओर बढ़ता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में AI से संबंधित शेयरों को लेकर दबाव की खबरों के बीच एशियाई बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) सूचकांक में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि जापान के निक्केई (Nikkei) में 2 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। सैमसंग जैसी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही विश्लेषकों की ओर से AI क्षेत्र में संभावित बबल को लेकर चिंता जताए जाने का भी उल्लेख किया गया। वैश्विक स्तर पर इन घटनाक्रमों के बीच भारतीय आईटी शेयरों में तेजी घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक रही।
डॉलर के मुकाबले 82 पैसे मजबूत हुआ रुपयाशेयर बाजार को सहारा देने वाला दूसरा अहम घटनाक्रम रुपये की मजबूती रहा। मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 82 पैसे मजबूत हुआ। इसके बाद एक डॉलर की कीमत 94.96 रुपये बताई गई। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों का भी संदर्भ रहा। सोमवार को केंद्रीय बैंक ने नॉन-डिलिवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े नियमों को सख्त किया था। इससे पहले शनिवार को आरबीआई ने तीन सरकारी तेल कंपनियों के लिए समर्पित डॉलर सप्लाई विंडो की जानकारी दी थी। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की मजबूती के बीच घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। हालांकि, बाजार की तेजी को केवल रुपये की चाल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि उसी दिन कई अन्य कारक भी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर रहे थे।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से शेयर बाजार को राहतअमेरिकी बॉन्ड बाजार से मिले संकेत भी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहे। 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटकर 5.2 प्रतिशत से नीचे आ गई। वहीं, 30 साल की बॉन्ड यील्ड गिरकर 5.56 प्रतिशत पर पहुंच गई और दो साल की बॉन्ड यील्ड 4.8 प्रतिशत से नीचे रही। बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलावों पर निवेशकों की नजर रहती है, क्योंकि इससे विभिन्न निवेश विकल्पों के आकर्षण पर असर पड़ सकता है। जब बॉन्ड बाजार में निवेश का रुझान मजबूत होता है, तब कुछ निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में इक्विटी बाजार पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके उलट, बॉन्ड यील्ड में गिरावट को शेयर बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। मंगलवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी भी बाजार के सकारात्मक माहौल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारक रही।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों को राहतवैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी बाजार की तेजी में भूमिका निभाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिका और रूस के बीच तेल समझौते की जानकारी दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका असर दिखाई दिया। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजार में रूसी तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है। इन्हीं संभावनाओं के बीच मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव घटकर 105 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें अब भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में काफी अधिक बताई गई हैं। तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को राहत मिलने की उम्मीद रहती है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड में नरमी, रुपये की मजबूती, आईटी शेयरों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे कारकों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
शेयर बाजार में मंगलवार की तेजी के पीछे एक साथ कई घरेलू और वैश्विक कारक रहे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की LTCG और STT पर टिप्पणी ने निवेश से जुड़े करों पर चल रही चर्चा को फिर से प्रमुखता दी, जबकि आईटी शेयरों में उछाल, रुपये की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को अतिरिक्त सहारा दिया। हालांकि, बाजार में तेजी या किसी सरकारी अधिकारी के बयान के आधार पर निवेश का फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।