'वंदे मातरम' के अपमान पर सोनिया गांधी मांगें माफी, रामदास अठावले ने साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग की है। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में अठावले ने कहा कि 15 अगस्त देश के लिए गर्व और सम्मान का दिन है और स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ ने लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने जिस तरह ‘वंदे मातरम’ का अपमान किया, उसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

अठावले ने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाकर बड़ी संख्या में लोग अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में शामिल होते थे। इसलिए इस गीत या नारे का किसी भी रूप में अपमान उचित नहीं है।

‘वंदे मातरम’ को लेकर क्या बोले अठावले?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 15 अगस्त भारतीयों के लिए गर्व का अवसर है और ‘वंदे मातरम’ का स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में इसके अपमान को सही नहीं ठहराया जा सकता।

अठावले ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कथित व्यवहार से केवल कांग्रेस का ही नहीं, बल्कि देश का भी अपमान हुआ है। उन्होंने मांग की कि सोनिया गांधी को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए।

‘दिमागी नक्सल’ पर भी रखी अपनी बात

बातचीत के दौरान रामदास अठावले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘बौद्धिक नक्सलवाद’ के संदर्भ में भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह बात इसलिए कही क्योंकि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई की है। अठावले के अनुसार, 99 प्रतिशत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाया जा चुका है और अलग-अलग क्षेत्रों में नक्सलवाद से जुड़े लोग मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नक्सली आंदोलन को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। अठावले ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलनों को शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री द्वारा ‘बौद्धिक नक्सलवाद’ खत्म करने की बात कहने का उद्देश्य देश में शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने लोगों से मिलकर देश के लिए काम करने की अपील भी की।
लोकतंत्र और संविधान का भी किया जिक्र

रामदास अठावले ने सत्ता और विपक्ष की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जिस राजनीतिक दल को जनता का बहुमत मिलता है, वही सत्ता में आता है। जनता यदि किसी दल को सत्ता सौंपती है तो वह सरकार चलाता है और यदि बहुमत नहीं मिलता तो विपक्ष में बैठना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। अठावले ने बाबा साहब आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के साथ किसी भी तरह का धोखा नहीं होने की बात कही।

उन्होंने इसी संदर्भ में ‘बौद्धिक नक्सलवाद’ को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि देश के लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक ढांचे को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।